आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

चरित्र निर्माण के सुनहरे क्षण

कब होता है यह ,और कैसे होता है , कोई नहीं जानता , जो आज वोट के लिए वीडियो में रोता नज़र आ रहा है वही कल किसी घोटाले में जेल में नज़र आएगा। अपने ५० लाख के नुक्सान के भरपाई के लिए एक सरकारी अधिकारी ने करोड़ों का घपला किया , कई करोड़ तो नकद घर से बरामद हुए हैं ,अब ये हो ऐसे गया कि जिसको लूटा वो ठेकेदार निकले और वो भी बड़े ,तो कइयों का चूना लग गया तो शिकायत हो गई ,शिकायत तो हुई पर करवाई भी हो गई क्यूँकि इनकी जान पहचान कई लोगों तक थी ,उस सरकारी अधिकारी ने वोलुएंट्री रिटायरमेंट के लिए आवेदन भी कर दिया था ,उसके एक सम्बन्धी के यहाँ करोड़ों के जेवर मिले हैं। चुनाव का माहौल है ,रैलियों पर पाबंदी है पर सरकार किसके हाथ होगी यह बता पाना मुश्किल है। 


“लेडीबर्ड “ फिल्म देखी कल ,वाइट गर्ल की कहानी और कॉलेज तक पहुँचाने के लिए उसके पेरेंट्स की मेहनत कहानी ,अमेरीकी प्राइवेट कॉलेज बहुत फीस चार्ज करते हैं और इसीलिए स्टूडेंट क़र्ज़ वहाँ बहुत ज्यादा है और एक राजनैतिक मुद्दा भी है और बहुत बड़ी परेशानी भी। कई निर्णयों से गुज़रना पड़ता है एक साधारण परिवार को अपने बच्चे के भविष्य को लेकर ,और बच्चा भी कई स्टेज से गुज़रता है अपने जीवन में अपने भविष्य को लेकर ,ख़ास कर जब वह स्कूल में होता है। माँ -बेटी के रिश्ते को लेकर अनूठे दृश्य हैं जिसमे पिता का यह कहना को कि दोनों का मजबूत व्यक्तित्व हैं और इसीलिए अक्सर दोनों के विचार अक्सर एक जैसे नहीं होते , या अक्सर दोनों में वाद विवाद चलता रहता है, लेडीबर्ड समझदार और आशाओं से भरा हुआ व्यक्तित्व है जो आगे अपने जीवन में बहुत कुछ करना चाहती है , और करती भी है , वहीँ उसकी माता जी अपने परिवार -समाज के सच्चाई से रूबरू हैं और प्रैक्टिकल हैं ,हॉस्पिटल में दो शिफ्ट में कार्य करती हैं ताकि परिवार खर्च चल सके।  


लड़कियों को अपने उम्र से पहले बड़े होने का दोष समाजिक ढाँचे पर है ,एशियााई देश तक ही यह सीमित नहीं है , प्रोटेक्शन के नाम पर एक अलग खेल खेला जाता है जो महिलाओं का पीछा अंत तक करता रहता है। अभी यहाँ एक बहस जारी है ,जिसमे सरकार का पक्ष है कि मैरिटल रेप को ग़ैरकानूनी नहीं करना चाहिए , सेक्स में कंसेंट की महत्तता का ज़िक्र कम होता है , बात इस इम्युनिटी कि है जो पुरुष के हाथ है शादी के बाद कि महिला का कंसेंट मान्य नहीं है और यही जड़ है इस समस्या की। कई पुरुषों ने ट्विटर पर “मैरिज स्ट्राइक “ के टैग से कोई आंदोलन भी चलाया है शायद। कई पुरुषों ने यह कहा कि इसका दुरुपयोग होगा ,झूठा मुकदमा होगा पुरुषों पर , तो उत्तर यह कि क्या न्यायलय और कानून निर्माताओं को फर्जी मुकदमों के डर से औरतों को उनके अधिकार से वंचित कर देना चाहिए ? दूसरी बात कि आंकड़ों पर गौर करेंगे तो पायेंगे कि महिलाओं को उत्पीड़न का खतरा उनके आस पास के लोगों से ही है , और अक्सर यह सभी मामले कहीं दर्ज़ नहीं होते। एक वकील ने यह भी कहा कि जब सेक्स की बात होती है शादी में तो पुरुष का मत स्त्री के मत से ऊपर कैसे हो सकता है , जबकि कानून सबको समान नज़र से देखने का दावा करता है ?

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