यादों की बारात
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कल से बारिश हो रही है , ठंड भी बढ़ चुकी है ,अखबार में लिखा था कि अभी एक सप्ताह तक ऐसा ही चलेगा ,लोगों को अपने इंतज़ाम कर लेना चाहिए , बिजली का भी कोई भरोसा नहीं है ,मगर फिर भी मौसम सर्दी का है तो थोड़ा बहुत तो बिजली देवता पर विश्वास करना बनता है। अब कुछ लोग सोचें कि बिजली विभाग को छोड़ देवता का आवाहन क्यों कर रहा हूँ ,तो उन्हें यहाँ यह बताते हुए हर्ष की अनुभव हो रहा है कि हमारे यहाँ जो दीखता नहीं वह देवता ही है ,और जिस पर आपका कण्ट्रोल न के बराबर हो तो फिर कहना ही क्या ?
कल आंटी ने बताया कि उनकी सुपुत्री की नौकरी लग गई है ,और उन्हें भी यहाँ से छोड़कर दूर शहर जाना होगा हर महीने १५ दिनों के लिए ,वैसे तो उनके सुपुत्र ने भी अपने नौकरी की जगह बदल अपनी बहन के शहर में करा लिया है ,परन्तु आंटी को यहाँ अकेले अपने बच्चों की चिंता होगी इसीलिए उन्होंने यह फैसला लिया है। कमरा देखा जा चूका है ,गैस सिलिंडर और बिस्तर -कपडे रवाना किया जा चूका है टेम्पो से कुछ दिन पहले सुबह सुबह।
जेम्स बांड की फिल्म बेहद घिसी पीटी कहानी सी लगी ,लगा वही बचपन वाली कहानी दोबारा दोहराई जा रही है ,बस लोकेशंस और एक्टर्स बदल गए हैं ,प्लाट कहानी का वही का वही है ,उस वक़्त भी रुस्सियन विल्लन थे और आज भी रुस्सियन ही विल्लन है ,वैसे बांड वाली फिल्मे और क्या देखने के लिए देखते हैं लोग, कहानी तो लगभग वही रहती है। हर एक दृश्य में बांड मौजूद है ,तीन घंटे की फिल्मे में विल्लन कुछ मिनटों के लिए ही आता है बस या यूँ कहे कि दूसरा हर किरदार बस कुछ मिनटों के लिए ही आता है ,बस केवल बांड ही बांड है अकेले , वही लड़ाई कर रहा ,वही प्रेम कर रहा ,वही कार चला रहा ,वही बन्दुक चला रहा है ,वही मर भी रहा है।
एक ही कार्य को बार बार करने से उसमे बेहतर होकर लोग अपने आपको एक क्षेत्र में सिद्ध घोषित करते हैं विश्व पटल पर ,खास कर खेल जगत में यह बहुतायत देखने को मिलता है या यूँ कहे बेहद रोचक ढंग से सामने आता है। और लोग मान लेते हैं कि जीवन के बाकी पहलुओं में भी अगर यह नियम लगा दे तो सफलता मिल जायेगी। ऐसा अक्सर होता नहीं है ,कला,जीवन, व्यपार और कई क्षेत्र में ९९ % ऊर्जा बेकार जाती है, मगर आपके साथ अनुभव होता है जो एक पूंजी है जीवन यापन के लिए।
अलविदा
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