आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

अपार विसंगति का मौखिक रूप

एक रोज़ एक अंग कार्य करना बंद कर देता है ,आप हताश निराश होकर आस पास के जन को दोषी करार देते हैं ,कोई समझ नहीं पाता इस परिवर्तन को ,फिर आपको अपने का एहसास होता है ,आप दूसरे अंग से दुनिया देखने का प्रयास शुरू करते हैं। “साउंड ऑफ़ मेटल “ में कुछ ऐसी ही कहानी रुबेन की है ,जिसे रिज़ अहमद ने बखूबी निभाया है। स्वयं का परिवर्तन से सबसे  पहले स्वयं को अवगत होना पड़ेगा ,इसमें समय लगता है मगर लोग आपके मदद को तैयार हैं बशर्ते आप अपनी मदद करना चाहे। अंत में यह बात रुबेन को समझ आती है और दुनिया को एक बेहतर नज़र से देखने की शक्ति मिल जाती है ,सब खेल नज़रिये का है। 


कल एक इंटरव्यू में एक राजनैतिक पार्टी के नेता ने एक प्रदेश के चुनाव के पहले अपनी जीवन गाथा सुनाई ,और अपने पार्टी के गठबंधन की भी चर्चा की कई अन्य पार्टियों के साथ ,और उन गठबंधनों के पीछे के सच का भी खुलासा किया। जिन शर्तों पर चुनाव के पहले गठबंधन होता है ,चुनाव जीत जाने के बाद वह शर्तें हवा में खो जाती हैं। चुकि वह नेता एक छोटी पार्टी के हैं तो बड़ी पार्टियाँ सदैव यह सोचकर उनसे गठबंधन करती हैं कि इनसे से बाद में विलय करा लेंगे अपनी पार्टी में। कुछ नौसिखुए यह सच चुनाव के पहले बोल देते हैं ,और कुछ चुनाव जीतने के बाद अपने गुलामों से कहलवाते हैं। मगर इस नेता को यह बखूबी मालुम हैं फर्क एक कार्यकर्त्ता और एक नेता में ,अब देखना यह है कि इस बार के चुनाव में जिस पार्टी के साथ गठबंधन हो रहा है वह चुनाव के बाद उनके शर्तों के साथ क्या खेल करती है। 


अक्सर इंटरव्यू में वह सब सवाल पूछे जाते हैं ,जिनके बारे में आपने सोचा नहीं था ,फिर आप कुछ ऐसा वैसा जवाब देकर आगे बढ़ जाते हैं। और बाद में सोचते रहते हैं कि उस प्रश्न का उत्तर ऐसा हो सकता था ,खैर यह तो हर घटना का रूप है ,इसमें कोई नयी बात नहीं। इसी बदलाव को जीवन का रूप मानकर आगे बढ़ते रहने की कला एक दिन मरघट तक लेकर जाती है जहाँ सभी पड़े हैं सदियों से। 



अलविदा 


Popular posts from this blog

कोरे कागज़ का सफर

किस्मतों के बुलबुले शर्म में सड़ गए

प्रलापी बूँदों के प्रवासक