आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

हिम्मतों के चर्चे

 हिम्मतों के चर्चे 


पुरस्कार वितरण समारोह में दूसरों के स्थान पर पुरस्कार ग्रहण करना एक हिम्मत का कार्य है ,ऐसा इसीलिए कह रहा हूँ क्यूँकि मंच से बेहद डर लगता था/है , और इसी कारणवश अपने स्थान पर अपने मित्र को पुरस्कार ग्रहण करने भेज चूका हूँ एक बार स्कूल में। वैसे हिम्मत ज़ाहिर करने पर राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिलता है। जो नहीं मिलता है वह यह कि जो वर्ग रोज़ हिम्मत का परिचय देते हुए जीवन बसर करता है उसके लिए पुरस्कार समारोह। वैसे तो नेतागण समारोह के बड़े प्रशंसक हैं ,कोई मौका हाथ से नहीं गँवाना चाहते अपितु नए नए मौके ईज़ाद करते हैं समारोह करने के ,ताकि भीड़ जुटे और वो भाषण देकर अपने नेतृत्व का असफल उदहारण जनता के समक्ष पेश कर सके। 


एक दिवसीय समारोह तो चलिए व्यक्ति झेल भी ले साल में एक दो बार ,मगर जिस वर्ग को रोज़ समारोह में अतिथि बनकर जाना पड़े उसकी ज़िन्दगी तो परदे पर अभिनय करने वाले कलाकार से भी बुरी होती होगी। अब यह मेरा अनुमान है ,वरना कइयों को यही दिनचर्या पसंद आती है ,तभी तो हर वक़्त टीवी /न्यूज़ /ट्रेंड्स में बने रहने के मौके तलाशते फिरते हैं। 


कल दो हास्य कलाकार को बातचीत करते हुए सुन रहा था ,उनके अनुसार इस सफर के शुरुआती दो तीन वर्ष गुमनामी और बिना कुछ कमाये ही निकालने पड़ते हैं। इन वर्षों में आप सीख रहे होते हैं ,उन्होंने इसको जेल टाइम का नाम दिया। कोई कलाकार चंद पल में वायरल नहीं होता ,उसके पीछे सालों की मेहनत और तपस्या छुपी होती है ,और जो चंद पल में वायरल होते हैं वह चंद पल में गायब भी हो जाते हैं। कोई भी क्षेत्र में प्रथम कुछ वर्ष तो यूँ ही गुज़रते हैं जिसमे व्यक्ति सीखता है और यह मापने की कोशिश करता है कि वह इसमें कार्य करने के लिए इच्छुक है या नहीं। 


ठंड दो दिनों से कहर कर रही है ,सूरज आता है मगर नहीं आता ,धुंध घेरे दिन को ,आभास भर होता है कि दिन हो चूका है और मन को तसल्ली दे रोज़मर्रा के कार्य में जुट जाते हैं लोग। वैसे जो कर्म में विश्वास करते हैं वह इन चक्करों में नहीं पड़ते ,हम जैसे मौसम विज्ञानी ही है जो बिना कोई ज्ञान के ज्ञान बाँटते हैं चौराहों पर। 



ओमीक्रॉन का कहर यूरोप में तबाही कर रहा है ,हमे भी सतर्क रहने की ज़रूरत है। यह वायरस तो रुकने का नाम नहीं ले रहा ,हमे ही रुक कर ,संभल कर ,आगे बढ़ना होगा। 


अलविदा 


Popular posts from this blog

कोरे कागज़ का सफर

किस्मतों के बुलबुले शर्म में सड़ गए

प्रलापी बूँदों के प्रवासक