आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

व्यक्तिगत विचार के मायने

 व्यक्तिगत विचार के मायने 

जो पिट चूका है और जो पीट रहा है ,दोनों में तालमेल आवश्यक है। कल बालकों की एक टोली कुछ यूँ ही खेल करते करते इसी मुक़ाम तक जा पहुँची थी कि मामला एक छोटे कुत्ते के बालक ने बचा लिया। उस कुत्ते के बालक को देखते ही सभी बालक अपनी आपसी मतभेद भूलकर उसके पीछे हो लिए। उन बालकों में एक के पास नई साइकिल थी ,जिससे बाकी बालक मोहित थे ,और अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे कि उन्हें भी हाथ आज़माने का शायद एक बार मौका मिल जाए। मगर ऐसा हो नहीं पाया क्यूँकि घर से बुलावा आ गया ,और वह बालक अपनी नई साइकिल लेकर उड़ गया। बाकी बच्चे थोड़ी देर तक उसे देखते रहे ,फिर अपने अपने खिलौनों में मशगूल हो गए। थोड़ी देर बाद वह बालक फिर लौट आया। और वह कुत्ते का बालक का मालिक भी ढूँढ़ते ढूँढ़ते मैदान में पहुँच चूका था। 



बचपन में साइकिल ही दुनिया थी ,नहीं मिल सकी तो अब क्या करे ,दूसरों के भरोसे रहे। जब कुत्ते के बालक से प्रेम हुआ ,तो वह दुनिया बन गया। वह मिला कई मिन्नतों के बाद ,मगर मैं नहीं रुक सका घर पर उसके साथ खेलने के लिए। और कई महीनों बाद लौटा ,तो उसके दुखद अंत की घटना की बात पता चली। वह ज़माना मोबाइल का नहीं था ,टेलीफोन थे लैंडलाइन वाले ,वह भी सबके पास नहीं थे। कुछ ३ रूपए से शुरुआती दर था अगर आप लैंडलाइन वाले फ़ोन का इस्तेमाल करे किसी  टेलीफोन दूकान में जाकर ,कई वर्षों तक घरवालों से बात करने का यही एक माध्यम था। 


ठण्ड में बच्चे सुबह स्कूल निकल जाते हैं ,और हम यहाँ छुपे रहते हैं सूर्य की कृपा के आस में। मैना और चील के उड़ान में अंतर है ,चील अपने डैनों को हिलाये बिना कई मिनटों तक आकाश में विचरण कर सकता है ,वही मैना ऐसा नहीं कर सकती ,चील ऊँचाई पर ही उड़ता है ,वही मैना हर जगह उड़ती है खासकर धरती और आकाश के समीप। कल अचानक नज़र एक चील पर पड़ी ,और काफी देर तक वह गोल गोल चक्कर काटता रहा बिना डैनो की हिलाये ,मनुष्य ने  भी अपने उड़ने के यंत्र यहीं से विकसित किये हैं। प्रकृति से सीखकर उसे ही ख़त्म करने के कगार पर आ चूका है मानव ,अब वह केवल विनाश से नहीं बल्कि निर्माण चाहता है नए प्रकृति का जो उसके सुविधानुसार कार्यरत हो। समस्त उपकरण वहीँ तो हैं जो अपने आरामदेह जीवन के लिए बनाये हैं हमने ,जीवित रह सके जितने अधिक वर्ष तक ताकि बाकी प्रजातियों को साफ़ कर सके। गर्मी में ठंडी के उपाय ,और ठंडी में गर्मी के उपाय ,सबका निर्माण हो चूका है। प्रकृति में अपनी मनमर्ज़ी का परिचय आदिकाल से देते आ रहे हैं हम। 


१० मिनट में ग्रोसरी डिलीवरी हो रही ,नहीं होने पर सेवा बंद की जा रही है। हॉस्पिटल ,न्यायलय ,और बाकी सेवाओं में भी यह चमत्कार गर हो जाए तो आनेवाली पीढ़ियाँ कुछ कम दुत्कारेंगी हमे। 


पालक और गंधारी साग के बीच का ज्ञान कल प्राप्त हुआ। अभी तो बहुत कुछ सीखना बाकि है। 


Popular posts from this blog

कोरे कागज़ का सफर

किस्मतों के बुलबुले शर्म में सड़ गए

प्रलापी बूँदों के प्रवासक