आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

विस्तृत जानकारी का मोह

 विस्तृत जानकारी का मोह 

सबकुछ जानना है ,सबका डाटा है ,पर उपयोग कैसे होगा वह ज्ञान ,इसका ज्ञान नहीं है। अत्यधिक जानकारी जुटाने भर से गर ज्ञानी पैदा होने लगे तो आज का समय सबसे अधिक अनुकूल है ऐसे लोगों के लिए। उन्ही जैसों में एक प्रजाति नेताओं की होती है ,वह लोगों की मानसिक पीड़ा को मापने की कोशिश चुनाव जीतने भर करता है ,एक बार कुर्सी मिल गई तब वह कुछ चाटुकारों को इर्द गिर्द ही अपने सोच को केंद्रित कर लेता है ,चाटुकार सलाहकर के भेष धारण कर ट्विटर पर ब्लू टिक लिए बैठ जाते हैं और दिन भर अपने नेता के सुनियोजित ट्वीट्स को रीट्वीट मारते हैं। इस चाटुकार के पास असीम शक्ति होती है ,वह अपने परिचितों को ठेका दिलवा देता है सरकारी कार्यों का और बदले में अपना कमीशन भी हासिल कर लेता हैं। चुकि समय कम होता है ,इसीलिए धनोपार्जन के अनंत उपाय खोज लिए जाते हैं ,किसी से कमिशन तो किसी से पार्टी फण्ड में डोनेशन ,तो किसी से रिश्तेदार के नाम ज़मीन और फ्लैट्स आदि आदि। 


स्थिति बदलने का वादा करने वाले जब दलदल में पहुँचते हैं ,तब वह भी वहाँ रम जाते हैं ,आनंद लेना शुरू कर देते हैं ,कोई भी परिस्थिति मानव सहन कर सकता है। आठवीं कक्षा में सहनशीलता पर भाषण देने के अवसर प्राप्त हुआ था स्कूल में ,अब भाषण में क्या बोलै वह तो नहीं याद है ,हाँ मगर इतना ज़रूर याद है की भाषण ख़त्म होने के बाद शिक्षक की टिपण्णी सहन नहीं हो पाई थी मुझसे। और शायद आज भी नहीं हो पाई है ,इसीलिए उनकी बातें याद हैं। जब कुछ नहीं मिले तो बदले की भावना ही लेकर मनुष्य जीवित रहना चाहता है ,सोचता है इससे बसर हो जाएगा और ख़ुशी मिलेगी। परन्तु ऐसा नहीं होता ,क्यूँकि बदले की भावना से उपजी ख़ुशी क्षणिक और अदृश्य होती है। वहीँ सेवा और प्रेम के भाव से मिली ख़ुशी कई जीवन काल तक बनी रहती है ,और हर स्मरण पर अंतर्मन को तृप्ति का एहसास कराती है ,जीवन सफल होने जैसे वाले ख्याल उत्पन्न होते हैं। 



आज जब अनेकों साधन मौजूद हैं दूसरों को प्रेम करने के, और अपनाने के/समझने के ,तो किस कर्म के लिए इनका उपयोग अधिकतम समय के लिए किया जा रहा है ? 



अमरूद अभी पके नहीं हैं ,फिर भी लोग कहाँ मानने वाले हैं ,कल पड़ोस की आंटी कह रही थीं गली के बच्चे कच्चे अमरुद को ज्यादा पसंद करते हैं ,और इसीलिए इतनी ठण्ड में भी पेड़ों पर उन्हें रहने नहीं देते। बच्चे तो बच्चे ठहरे ,मैंने उनसे कहा कि बड़ों को कौन समझाये। और सभा समाप्त हो गई। 


Popular posts from this blog

कोरे कागज़ का सफर

किस्मतों के बुलबुले शर्म में सड़ गए

प्रलापी बूँदों के प्रवासक