आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

ज़िंदादिली का खिताब

 ज़िंदादिली का खिताब

किसको कहीं पर भी खुश देखकर क्या आप भी खुश हो जाते हैं ,अगर ऐसा है तो आप अकेले नहीं हैं ,इसका मतलब आप भले न खुश हो लेकिन दूसरों की मदद करें तो सच्ची ख़ुशी हासिल की जा सकती है जो अधिक समय तक टिकी रहती है। आजकल जहाँ हर महीने सेल और क्षणिक खुशियाँ बाँटी जा रहीं ,वहाँ यह फार्मूला लाभकारी हो सकता है कई मानवजन के लिए।
वैसे इसमें कुछ नया नहीं है ,यह सभी जानते हैं कि दूसरों के मदद करने से आप को मदद मिलती है ,आप खुश होते हैं ,जीवन के प्रति आपका नजरिया सुखद और आशावादी होता दीखता है ,सवाल यह यह कि लोग अपनाते क्यों नहीं है इसे लंबे अंतराल तक। कुछ ने तो इसको धर्म के रास्ते भी जोड़ कर इसका प्रचार करने की कोशिश की ,मगर तब यह धर्म में ही सीमित रह गया तो मानवता से दूर होता चला गया।
धर्म ने इतना असर कर लिया है कि राजनीती वाले भी इसके बिना वोट नहीं ले सकते ,तो इसका असर कितना है यह सभी जानते हैं ,इसीलिए मानवतावाद को छोड़ धार्मिक बनाने के हज़ारों रास्ते और उपाय हैं ,एक गुट को खड़ा करना धार्मिक ज़मीन पर बेहद आसन और सरल है उनके लिए जिन्हे कुछ ठोस हासिल करना है जैसे धन अथवा सत्ता या फिर समाज में मान सम्मान। सितारे और खिलाडी और वैज्ञानिक तक धार्मिक के अंधविश्वास में पड़कर न जाने क्या क्या सलाह और खेल किया करते हैं।
धर्म के गुणों की भी लम्बी फेहरिस्त है ,मगर उसकी चर्चा किसी दिन और करेंगे। शांति और संतोष का प्रचार सभी धर्म वाले करते हैं ,मगर जहाँ धन और शक्ति की बात होती है वहाँ थोड़ा डगमगा जाते हैं। अनुशासन और विनय की सूक्ति अपने शिष्यों /प्रचारकों को बड़े निष्ठा से पढ़ाते हैं पर इसका पालन अपने घर में नहीं करते हैं।
खैर ! मानव के पास धर्म है जो सदियों से न जाने क्या क्या रंग दिखाता रहा है ,और मात्र कुछ वर्गों के ऊपर ही इस्तेमाल किया जाता रहा है –कभी उनके वोट के लिए तो कभी उनकी धन के लिए तो कभी उनकी ज़मीन के लिए।
एक आनेवाली हिंदी फिल्म में एक पुरुष सितारे (एक्टर तो नहीं ही कह सकते हैं क्यूँकि उनकी फिल्मों में कभी उनको ऐसा करते देखा नहीं ) अपनी उम्र से आधी उम्र के महिला के साथ प्रेमालाप करते नज़र आते हैं। अभी केवल फिल्म का ट्रेलर लांच हुआ है ,और फिल्म शायद अगले महीने आएगी। एक सावधानी यह हो कि बिना फिल्म देखे कुछ टिपण्णी करना कठिन कार्य है ,या यूँ कहे कि कहाँ तक सही है।
तो परेशानी क्या है ? उम्र के हिसाब किताब कौन रखे ,वह तो अपने आप को फिट रखते हैं ,और इंस्टा पे यह फोटो डालते हैं कि दो बच्चों के बाद भी उनकी शारीरिक फिटनेस में कड़ी मेहनत करते हैं। “दो बच्चों के बाद “ वाला डायलॉग तो अक्सर महिलाओं के साथ सटीक और ठीक बैठता है ,मगर एक पुरुष यह बात कहे , तो समाजिक समरूपता की ओर बढ़ते कदम तो नहीं ही कहेंगे इसे।
टिप्पणीकारों को भी निराशावादी के एक केटेगरी में डालकर लोग निश्चिन्त हो चुके हैं ,इसीलिए पहिया घूमता रहे ,और इनक्वॉलिटी इंडेक्स में हमारी क्या रैंकिग है यह चेक ना करे तो स्वास्थ्य बेहतर होगा ,और बाकि बिडेन डेमोक्रेसी कोंफ्रेरेन्स कर रहे हैं। जिस देश ने हज़ारों बार दूसरे देशों में तख्ता पलट और तानाशाहों को सपोर्ट किया ,वह लोकतंत्र पर भाषण देने लगे तो समझिये उसको डर टूटते लोकतांत्रिक मूल्यों का नहीं है बल्कि इसका है कि उसके जैसे दूसरे देश भी पैदा हो चुके हैं। २० साल पहले अफगानिस्तान पर क्या बोलकर हमला किया था ,और आज क्या बोलकर वहाँ से भाग रहे हैं ,जो दुश्मन था उसे वार्ता कर मामला रफा दफा किया जा रह है। और हाँ, व्हाट्सप्प क्रिप्टो पेमेंट टेस्ट कर रहा है अमेरिका में ,यहाँ तो बिल आ रह है कोई –आगे देखिए क्या होता है।
स्वप्नों का सितारा

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