विभूतियों का अविष्कार
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विभूतियों का अविष्कार
निर्लज्ज प्राणी सत्ता में बने रहने के लिए कोई भी खेल खेल सकता है ,अनेकों ऐसे प्राणियों का ज़िक्र हो चूका है इतिहास में ,क्या नहीं हुआ है कि वह ऐसा क्यूँ करता है बार बार ,क्या रूप बदलने से लोग पहचान नहीं पाते ,नई तकनीक के माध्यम से भी नहीं पहचान पाते ,आखिर क्यूँ है कि लोग अक्सर धोखा खा जाते हैं ? उत्तर बहुत आसान है –विश्वसनीय कहानी ,वह कहानी सुनाता है आशा की ,उम्मीद की ,ईमानदारी की ,सुविचार की ,सुनहरे कल की। ऐसी कहानियाँ जहाँ सभी खुश है ,सबको समान अवसर मिलता है ,जाति -लिंग और त्वचा के रंग और पैसे के रुतबे के आधार पर भेद भाव नहीं है।
यह कहानियाँ सुनने में तो बहुत प्रिय और मनोहर लगती है ,मगर इनका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं होता ,क्यूँकि उस वक़्त जन -जन इतना त्रस्त हो चूका होता है वर्त्तमान परिस्थिति से कि वह कहानी और हकीकत में फ़र्क़ करने में चूक कर बैठता है। अक्सर युद्ध के बाद उपजे निराशा /आशा ,या भ्रष्ट तंत्र ,या डूबते मूल्य ,या और कुछ मनगढंत मुद्दा ,कोई भी आधार लेकर कहानी गढ़ी जाती है ,सपने देखने का शौक किसको नहीं है ,ऐसा न होता तो करोड़ों लोग जो गरीबी -भुखमरी और जाति का दंश झेल रहे हैं वह कैसे जीवित रह पाते। वह आशावादी हैं ,उन्हें बेहतर होते कल पर भरोसा है ,उम्मीद है आनेवाला पल उनके मेहनत का सुफल परिणाम लेकर आयेगा। पीढ़ियाँ दर पीढ़ियाँ हमे केवल यही संदेश मिलता है।
बम लगा दिया एक वैज्ञानिक ने कोर्ट में दिल्ली के ,पडोसी से कुछ खटपट थी ,तो आप समझ सकते हैं कि मनुष्य चाहे तो कहाँ तक पहुँच सकता है अपने बदला को पूरा करने के लिए। तंत्र मिलकर नया यंत्र अविष्कार कर रहे हैं जिसमे आमजन को थोड़े और एफ्फिसेंटली मानसिक क्षति पहुँचा सके। एक अमीर व्यक्ति जेल से बाहर निकलने के लिए एक व्यक्ति को २०० करोड़ रूपये देने को तैयार हो गया ,और ख़ास बात यह है कि वह व्यक्ति भी जेल में उसके साथ ही था ,पैसे तो ले लिए उसने अमीर व्यक्ति की बीवी का भाई बनकर ,मगर जेल से नहीं निकलवा पाया ,और अब अख़बार में ऑडियो क्लिप चल रही है।
पहचान क्या है आपकी ? आपका स्कूल ,आपके मित्र/परिजन ,कंपनी /टाइटल ,क्षेत्र ,लिंग ,त्वचा का रंग ,पैसे की धमक ,जाति ,धर्म ,शरीर की लम्बाई ,भाषा ,या सबकुछ। यह सब निकाल दे तो क्या हैं आप ? इंस्टाग्राम पर बड़े अधिकारी (सरकारी ) बायो में लिखते हैं ये पर्सनल हैंडल हैं ,मगर अपना पोस्ट और टाइटल मेंशन करना नहीं भूलते ,ट्विटर पर भी यह अधिकारी कुछ यूँ ही करते हैं। तो आप सोचिये वह क्या सोचकर ऐसा करते हैं ?
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