त्रिकोण का सर्वनाश
- Get link
- X
- Other Apps
कितनी ही आलोचनाओं से गुज़रने के बाद कुछ हासिल हो तो अधिकतम ख़ुशी का अनुभव होता है ,लोग जिन्हे ये अनुभव होता है ,वह कम हैं विश्व में ,क्यूँकि प्रतिकूल धारा में तैरना सदैव कठिन रहा है जबसे मानवों ने कृषि अपना एक स्थान पर बसर करना शुरू कर दिया है। क़स्बे बढ़ते गए ,और आपसी तालमेल भी। बाहरी डर जो पहले जंगली जानवरों से था ,वह अनजाने लोगों में तब्दील हो गए ,हैरानी की बात यह है कि इंटरनेट आने के बाद भी इन असमानताओं /डर में कमी नहीं बल्कि इनको कमजोरी बता राजनीति वाले हर ५ साल बाद खेल करना शुरू कर देते हैं। मानवजन का भी पहला रिएक्शन सदैव अजनबी /अनजान से डर का ही होता है ,और तुरंत स्वयं को खतरे से बचाने वाली घंटी बज उठती है ,इंटरनेट ने फॉल्स अलार्म की दर तेज कर दी है। सदैव चौकन्ना रहने को मजबूर कर दिया है।
मीर क़ासिम और सुजा दौला और शाह आलम पटना पहुँचते हैं अंग्रेज़ों से लड़ाई के लिए ,मगर मीर क़ासिम न स्वयं लड़ता है और ना ही अपने सैनिक भेजता है आगे लड़ाई के लिए और जब सुजाऊदौला खबर भिजवाता है कि वह स्वयं नहीं आ सकता तो कम से कम अपने सैनिकों को भेजे। शाह आलम इस पुरे युद्ध के दौरान अंग्रेज़ों से संपर्क में रहता है ,और अपनी स्थिति साफ़ करता रहता है कि उसका इस युद्ध से कोई सरोकार नहीं है। शुजाउदौला जीतते जीतते हार जाता है हेक्टर मुनरो से ,कुछ महीनों भागने पर अंत में समझौता हो जाता है। इधर शाह आलम अंग्रेज़ों को बिहार ,बंगाल और ओडिशा की दीवानी सौंप देते हैं। कुल मिलकर अंग्रेज़ो का सपना पूरा हो जाता है ,और लूट को एक मुग़ल शाह द्वारा आधिकारिक मोहर लग जाती है। असर यह होता है लूट का ,कि बंगाल में तीन साल सूखा पड़ता है फिर भी लगान वसूला जाता है और कई जगहों पर निर्धारित शुल्क से अधिक ,१७७० का बंगाल अकाल लाखों की जान लेता है ,हज़ारों मरते हैं मगर अँगरेज़ कुछ नहीं करते ,उल्टा कालाबाज़ारी और जमाखोरी जमकर होती है राशनों की। विलियम डालरेम्पले की किताब के अनुसार भारत में बसने वाले अँगरेज़ ने सबसे अधिक पैसा वापस अपने देश इंग्लैंड भेजा इस साल। अर्थात जो अकाल लाखों को मार रहा था ,वहीँ अँगरेज़ और ईस्ट इंडिया कंपनी अपने शेयर दोगुनी कर चुकी थी. कुछ ने कैंप लगाकर रोज़ मुफ्त भोजन की व्यवस्था करवाई थी बनारस और पटना से राशन मंगाकर पर कई बार कंपनी के व्यापारी उसे लूट लेते थे ,कई जिलों में कुछ अंग्रेज़ों ने भी भोजन की मुफ्त व्यवस्था करवाई थी ,मगर कंपनी ने कोई कदम नहीं उठाया था। रोबर्ट क्लीवे अथाह सम्पति का मालिक बन चूका था कंपनी के शेयर खरीद कर ,बंगाल आने पर उसने इंग्लैंड में सबकुछ बेच कर कंपनी के शेयर खरीद लेने के आदेश दिए थे।
अगले सात दिनों तक तापमान बेहद कम रहने के अनुमान मौसम विभाग ने लगाए हैं ,न्यूनतम १० डिग्री तक तापमान हो सकता है ,और सुबह शाम कुहासा भी रहेगा। एक रूम हीटर था ,मगर समय रहते उसकी देखभाल नहीं की गई ,और आज वह बेकार पड़ा है। सही समय क्या है कार्य को करने का ,यह सही समय बीत जाने की बाद ही समझ आता है। तब हम सही समय की परिभाषा में बदलाव कर जब जागो वाला दोहा सुना कर मन को सांत्वना देने की कोशिश करने लगते हैं। व्यायाम करने की आदत भी पिछले दो सप्ताह से शुरू की है ,शारीरिक व्यव्याम अत्यंत आवश्यक है एक उम्र के बाद ,नहीं तो उम्र भर परेशानी अपने आकार से बड़ी नज़र आती हैं।
कल जिस वैज्ञानिक की बात कर रह था ,उन्होंने जीन एडिटिंग पर शोध किया है ,करीब ३५०० मच्छरों की प्रजाति में केवल कुछ ही हैं जो मलेरिया के वाहक हैं ,उनका कहना है कि उनके खोज से इन मच्छरों में जीन एड़ीटंग कर इनकी जनसँख्या को नियंत्रित कर सकते हैं। और जब मलेरिया नियंत्रण में हो जाए तो फिर यथास्थिति करने का प्रयत्न किया जाये। इस टेक्नोलॉजी के दुष्परिणाम यह हैं कि मानव को दूसरे प्रजाति पर नियंत्रण मिल गया ,वह उनके प्रजनन और जनसंख्या को मनचाहा स्वरुप दे सकता है ,जो घातक साबिक हो सकता है इकोलॉजी और प्रकृति के लिए। मानव जीन एडिटिंग के बारे में उन्होंने कहा कि चुकि मानव की जीवन रेखा अधिक वर्ष तक बाकि कई प्रजातियों की तुलना में ,तो उनके ऊपर कोई विशेष प्रयोग के असर हमे कई सालों बाद /कई पीढ़ियों बाद नज़र आयेंगे –अगर कोई ऐसा करता है तब।
कथा आज की यहीं समाप्त होती है। दिन निकल चूका है और मैंने अभी तक रज़ाई नहीं निकाली। wpi (होलसेल प्राइस इंडेक्स) १२ % के ऊपर है ,यानि महँगाई आसमान छू रही है ,खाद्य पदार्थ और तेल के दाम कितने है ये तो आप जानते ही हैं। खैर ! कुछ लोग तो अभी भी अनजान हैं इससे।
- Get link
- X
- Other Apps