आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

मिथकों का देश

संसद में न्यायधीश चुनाव प्रक्रिया पर चर्चा होती है ,एक ही जाति और एक ही परिवार के न्यायधीश कैसे बनते आ रहे हैं इतने सालों से ,पारदर्शिता नहीं है चुनावी प्रक्रिया में ना ही विवधता है ,और इसके फलस्वरूप कई नकारात्मक परिणाम आम जनता को भुगतने पड़ते हैं। फिर एक न्यायधीश का बयान आता है कि ऐसा नहीं है ,अब उनके बयान पे विश्वास करे कि ऐतिहासिक तथ्य पर। कमीशन की बात कई बार पेश हुई ,मगर खतरा न्यायपालिका को अपनी स्वतंत्रता का होता है ,तो यह सोचे कि अभी न्यायपालिका कितनी स्वंतत्र है और कितना लाभ आम जन को मिल पा रहा है ,अपने आस पास पता करे कि कोई है जो कोर्ट के चक्कर काटने को उत्सुक है। 


घटनाओं पर बयानबाज़ी से राजनितिक पार्टियों के सोच का पता चलता है ,उनके चुनावी घोषणापत्र से नहीं। और जब ऐसी घटना हो जिसपर कोई दल कोई टिपण्णी नहीं दे ,तो समझों यह मुद्दा बेहद नाज़ुक और संवेदनशील है ,और चुनाव नज़दीक हैं। धर्म जुड़ जाए गर इन सब में तो सोने पर सुहागा ,और ज्यादातर मुद्दों में धर्म केंद्र बिंदु होता है। कोई इतिहास के गड़े मुर्दे उखाड़ता है ,तो कोई कभी न पुरे हो सकने वाले स्वप्न की बात करता है ,मगर सभी का मक़सद केवल एक है ,और वह यह कि नए मुद्दे पैदा हों जिनका असल जीवन से कोई सरोकार नहीं हो ताकि चुनाव होने तक चीज़े एक दल के तरफ ही बनी रहें। 


नए शहर जाना एक कठिन कार्य है ,मगर लाखों लोग रोज़ यह कठिन कार्य करते हैं ,और सदियों से करते आ रहे हैं। उत्तर है उन्हें बेहतर कल की तलाश है ,बेहतर भविष्य सात समुन्दर पार ले जाता है। कल ऐसी ही एक कहानी सुन रहा था यूट्यूब पर ,९५ -९६ में अमेरिका शिफ्ट हुए व्यक्ति ने आज करोड़ों की अपनी कंपनी खड़ी की है ,जबकि पहली बार अमेरिका जाने के लिए प्लेन का किराया तक नहीं था उसके पास।  अपनी जीवन गाथा में अपनी माता और पत्नी के अथक सहयोग की भी बात करता है वह व्यक्ति। अपनी पत्नी से मिलने की कहानी भी बड़ी रोचक तरीके से बयां करते हुए एक कहानी सुनाता है। उस समय इंटरनेट अपने शुरुआती दौर में था ,और केवल चंद लोगों /संस्थाओं के पास ही उसकी व्यवस्था था। तो अपनी यूनिवर्सिटी के लैब के कंप्यूटर से  दूर भारत में बैठे एक अनजाने से पहली बार की बातचीत ९ घंटों तक चलती है ,और सिलसिला फिर आगे बढ़ता चला जाता है। 


आज जब एक दूसरे के बारे में सारी जानकारी मौजूद हैं ,तब भी बहुत लोग परेशां हैं ,विकल्पों के बाढ़ में डूबते हैं ,और उस वक़्त विकल्पों का अभाव ही एक मात्र सही रास्ता हुआ करता था। जो चाहिए वह मिल जाए तो सबसे अधिक मुश्किल होती है। बहुत लोग किस्मतवादी हो जाते हैं ढलती उम्र के साथ ,एक उम्र से वाकिक हो जाने के बाद अनुभवों को देखने का नजरिया बदल जाता है ,लोगों के साथ वव्यहार का ,और संबंधों का तरीका भी बदल जाता है। आपको लगता है आप बुद्धिमान हो चुके हैं ,और अपने अनुभवों से बहुत कुछ सीख लिया है। परंतु ऐसा सचमुच हो –यह ज़रूरी नहीं है। एक बार साधारण रेल के डब्बे में सफर कर अपने अनुभव की जाँच परख अवश्य करें। 


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