असफलता के संदेश
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असफलता के संदेश
संदेश भेजने के तरीकों में कई बदलाव हुए हैं इंटरनेट के आने के बाद ,मामला पूर्णरूपेण बदल सा गया है। जो नहीं बदला है वह है संदेश के पीछे का भाव -वह आज भी लगभग वही है और शायद आगे भी वैसे ही रहे।
कल शाम एक दुःखद संदेश प्राप्त हुआ ,असफलता का संदेश ,वैसे असफलता का यह पहला संदेश नहीं था ,हज़ारों ऐसे संदेश पढ़ चूका हूँ ,या यूँ कहे केवल ऐसे ही सन्देश पहुँचते हैं मेरे पास ,तो कुछ अभ्यस्त हूँ इनकी रचना और बनावट से ,शब्दों के हेरफेर कई अनछुपे बात कहते हैं जिसे केवल वही जान सकता है जिसके लिए यह सन्देश भेजा गया है।
साधारण सा दिखने वाला सन्देश अपने साथ कई भाव छुपाये रखता है ,और अलग अलग समय पर अलग अलग भाव फूट पड़ते हैं। कभी किसी को पढ़कर आप तनिक भी विचलित नहीं होते क्यूँकि आपको इस सन्देश के आगमन का पूर्वानुमान होता है ,तो कुछ संदेशों को पढ़कर अश्रुधारा भी बह निकलती है क्यूँकि इनके आगमन का आपको पूर्वानुमान बिलकुल नहीं होता। यह मैंने दो छोर पर दो भाव का ज़िक्र किया है ,मगर इनके बीच में भी कई पड़ाव हैं जिससे बहुत लोग वाकिफ हैं।
तो ऐसे संदेशों के जवाब लिखने के तरीके भी काफी संतुलित और ठोस हो चुके है ,उन्ही शब्दों में लिखना ,या वैसे ही भाव में लिखना जैसे सन्देश लिखा गया है ,ताकि समरसता कायम रह सके वाद -विवाद में।
इन संदेशों को पढ़कर दुःख होता है ,इस दुःख को कम करने का तरीका यह है कि इनसे दूरी बनाकर रखें। मुश्किल कार्य है ,मगर इनसे दूरी आपकी प्रगति के लिए हानिकारक होती है ,इनका आना एक सुखद संकेत है कि कार्य ज़ारी है। इसीलिए वैसे तो यह क्षणिक कष्ट प्रदान करते हैं मगर इनके दूरगामी परिणाम बेहद अनुकूल प्रभाव पैदा करते हैं आपके विकास और जीवन उत्थान पर।
अंत में यही कहूँगा कि, संदेश का जवाब एक मौका है ,जिसमे व्यक्ति विशेष एक नया रास्ता तय कर सकता है बेहद कम समय में। अंतर बस सोच का है। शुक्रिया।
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