आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

उम्मीदों का सफर

 उम्मीदों का सफर 

कितनी दूर चलकर भी राही थकता नहीं ,एक बार लखनऊ के एक सरकारी अस्पताल में मैंने एक डॉक्टर से यही सवाल पुछा था ,उनका जवाब था ऐसा कि कुछ समझ नहीं आया मुझे ,पर उन्होंने अपने कर्तव्य के प्रति अपनी निष्ठता को प्रदर्शित कर दिया था। इतना तो उस वक़्त मुझे समझ आया था ,और उनसे आगे कोई सवाल नहीं पूछा मैंने। सफलता और संतोष एक साथ मिले तो ख़ुशी की लहर ज़रा तेज़ दौड़ती है ,पर अक्सर ऐसा हो नहीं पाता है। केवल संतोष के साथ करोड़ो लोग अपना जीवन रेल के पटरियों की भातिं सरपट दौड़ाये जा रहे हैं। 


सच्ची ख़ुशी कल एक विकट समस्या के हल होने पर प्राप्त हुई ,यूँ एक बुरे अनुभव से मानव प्रजाति से मायूस हो जाने वाला प्राणी हूँ ,मगर वही एक सुखद अनुभव से उस मायूसी को ख़ुशी में भी तब्दील होते देर नहीं लगती। वह कहते हैं न कि आशाओं की डोर ही खींचती रहती है कब्रिस्तान तक हमे ,वरना तो ग़ालिब कब के शौके ऐ शहादत दिल में लिए फिरते हैं। इसीलिए जब तक तराज़ू बराबर न हो जाए हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। 



पड़ोस के आंटी की तबियत कल से ख़राब है ,सर्दी -सरदर्द और खाँसी ,जब आज उनसे इसके बारे में मैंने पूछा तो उन्होंने बताया कि वह कल रात भर सो नहीं पाई ,और घरेलू उपायों का नुस्खा कई दफा इस्तेमाल कर चुकी हैं ,जैसे काली मिर्च -अदरक -तुलसी पत्ते के मिश्रण का सेवन ,और आज ऐसा नहीं कर सकती क्यूँकि आज के दिन तुलसी पत्ते को हाथ नहीं लगाना चाहिए। आंटी के सुपुत्र कुछ दिनों तक तो यहीं थे ,मगर शायद पिछले सप्ताह फिर अपने कार्यस्थल की ओर रवाना हो गए हैं ,जब थे तब उनके यहाँ बिजली गुल हो गई थी। किसी बिजली वाले को बुलाने के कई प्रयास का ब्यौरा आंटी ने दिया था मुझे जब वह अपने पुत्र का फ़ोन चार्ज करने हेतु लेकर आई थी कुछ दिन पहले। तब मैंने आज सोचा ,कि अपने पुत्र के फ़ोन चार्ज करने के लिए आंटी ने दरवाज़ा खटखटाया ,पर अपनी ख़राब तबियत के लिए अपनी सुपुत्री को या फिर हमारे यहाँ कुछ नहीं कहा। वो तो आज कई वर्षों बाद फिर प्रकृति की सैर करने की इच्छा हुई और मैंने घर के बाहर कदम रखा तो सोचा उनसे पूछूँ। 



पहली बार तो मौका नहीं मिला ,मगर दूसरी बार मैंने पूछ ही डाला ,और उन्होंने अपना हाल सुनाया ,और शाम को अंकल के आने की भी बात उन्होंने बताई। अपनी सुपुत्री के हवाले से कहा कि उन्होंने उससे एक विक्स की गोली लाने का आग्रह सुबह किया था ,मगर उनकी सुपुत्री ने कहा कि वह शाम को ही लेकर आएगी और इसीलिए दिन भर टीवी पर तब तक एकता कपूर के सीरियल्स देखकर तबियत को सुधारने का प्रयास किया जा रहा था। 


मैंने कहा कि कुछ ज़रूरत हो तो हमे इत्तिला करें। 


दवाई आखिर खोज निकाली मैंने, और एक क्रीम भी ,दवाई तो उन्होंने झट ले ली ,मगर क्रीम के बारे में कहा कि वैसा ही एक क्रीम उनके पास भी है। 


शाम को अंकल आये ,दवाई आई या नहीं ,यह नहीं पता। मगर मुख्य सवाल यह है कि आंटी ने अपने ख़राब तबियत के लिए दरवाज़ा क्यूँ नहीं खटखटाया, बल्कि अपने पुत्र के मोबाइल चार्ज के लिए दो बार आवाज़ लगाई। अपने स्वास्थ्य को हलके में लेने के कई उदहारण मैंने देखें हैं अपने आस पास. सबका उत्तर कुछ एक जैसा ही है। 


बिजली वाले बंधू भी ,थोड़ी देर से ही सही ,मगर आकर अपना कार्य सिद्ध कर जा चुके थे।  यूँ ही दुनिया चलती रहनी चाहिए ,वरना तो बाकि बिल्लियों ने इंस्टाग्राम पर कब्ज़ा कर ही लिया है , आप अपने इंस्टा फीड को बचाकर रखे ,अब इंस्टा वाले क्रोनोलॉजिकल फीड ला रहे हैं ,उन्हें अपने अल्गोरिथम पर भरोसा नहीं रहा या हो सकता कांग्रेस की मीटिंग हो। कहना मुश्किल है। 


अलविदा 


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