अतिथियों का सत्कार
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अतिथियों का सत्कार
सत्कर्म के सुफल होते हैं ,यह मिथक वर्षों पहले हज़ारों बार तोडा जा चूका है ,मगर कहानी से यह मिथक टूट नहीं पाता ,मानव अब भी इसमें विश्वास करने को सदैव लालायित रहता है –अपने घर में न सही ,दूसरे से तो यह अपेक्षा करता ही है।
विकट परिस्थिति है सामने ,मूल्यों का क्षार होता देख मन द्रवित होता है ,फिर पालक पनीर बना व्यक्ति सबकुछ भूल जाता है। दुःख कुछ एक क्षण भी हों मानव जन को अंत नज़र आने लगता है। कल एक वेब सीरीज देखी ,मत्स्य कांड। अभिनेता अभिनय के सिवाय सबकुछ करते नज़र आये ,सस्पेंस और थ्रिलर साबित करने के लिए कैसे कैसे दृश्य हैं ,और संवाद पुराणों को लेकर आज के संदर्भ में लिखे गए। महाभारत और रामायण से निकल नहीं पाए ,उन्ही को रिपीट करने में लगे हैं सब।
आप दूसरों से दुःख क्यों बाँटना चाहते हैं ? क्या इससे आपके दुःख में कमी आती हैं ? दुःख वही रहता है ,उसकी मात्रा उतनी ही रहती है ,तो फिर क्या बदलता है दूसरों को सुनाने के बाद ,यूँ प्रतीत होता है कि आपने बोझ को उतार फेंका ,एक कड़ी तोड़ आगे बढ़ गए ,परिस्थति उतनी बुरी /अच्छी होती नहीं जितनी अपनी मनः स्थिति में स्थापित करते हैं हम।
जो बचता है आपके पास वह है आपकी मेहनत ,बाकि तो काफ़िले में कई सवारी अपनी अपनी रेस में हैं ,या तो आप उनके रेस तो देखें या अपनी पोटली संभाले। यहाँ तो बाजार ने पानी के भी टाइप निकाल दिए हैं –ताकि उसे बेच सके एक कॉम्प्लेक्स का निर्माण कर ,त्वचा और लिंग के आधार पर तो भरमार है बाजार में वस्तुओं की। बनाने वाले भी वही लोग और प्रयोग करने वाले भी वही लोग।
कल एक इंटरव्यू में एक व्यक्ति अपनी मेहनत से अधिक अपने लक को अपनी सफलता का कारक बता रहा था ,कहाँ पैदा हुआ ,कहाँ पढाई की ,कहाँ स्कूल गए ,और कौन दोस्त हैं। ललित मोदी के बचपन के मित्र जय मेहता आईपीएल में टीम खरीदी ,ललित पर कई लोगों ने आरोप लगाए की उन्होंने बहुत गड़बड़ की आईपीएल में ,और वो आजकल लंदन में हैं। सच क्या है वह यहाँ लिखने की ज़रूरत नहीं ,वह तो सभी मानते हैं कि कैसे यहाँ किसकी किस्मत बदल जाए यह कोई नहीं जानता बशर्ते आपके कॉन्टेक्ट्स हों कुछ लोगों के साथ जिनको पता हो कि सत्ता की नदी किस धार बह रही आजकल।
ठंड बढ़ चुकी है ,सर्द हवाएँ चल रही हैं ,हम भी दौड़ रहे हैं। चुस्ती -फुर्ती का अनुभव दौड़ने से होता है ,भोजन सुचारु रूप से यथास्थान क्रिया करता है शरीर में ,और आस पास के लोग भले नज़र आने लगते हैं। स्थिति बेहतर होने की कल्पना बनी रहती है ,कंट्रोल अपने पास होने का भ्रम और मजबूत हो जाता है। बस यूँ कुछ और वर्ष काट लिए तो बाकि तो क्लाइमेट चेंज अपना काम कर ही देगा।
एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की हत्या साँप से कर दी ,उसने तीसरी बार प्रयास किया था अपनी पत्नी को मारने का ,कोर्ट में यह प्रूफ हुआ की उसने ही कमरे में साँप को छोड़ा था। क्यों किया आखिर ऐसा जब दहेज़ में बहुत कुछ मिल चूका था ? दहेज़ ? लड़की के माता पिता ने क़र्ज़ में डूब कर शादी कराई थी.
शादी की उम्र बढ़ा दी गई। क्या होगा असर ?
ट्विटर पर एक पुरुष ने एक विशेष नेता का नाम लेकर धन्यवाद रुपी hastag लगाकर ट्वीट किया। उसके अनुसार इससे महिलाओं को अपने कैरियर में सहूलियत होगी और अब वह जल्द शादी नहीं करेंगी और घटता प्रतिशत महिलाओं का कार्यक्षेत्र में बढ़ेगा। वह पुरुष उस कंपनी के लिए कार्य करता है जिसका हाल में ही आईपीओ हुआ जोर शोर से। वही कुछ देर पहले एक दूसरे ट्वीट में वह यह कमेंट कर रहा था कि rbi के नए रेकरिंग पेमेंट नियम से कई व्यक्तियों/संस्थाओं को बेहद दिक्कत हुई है ,इस कमेंट में वह ease ऑफ़ doing बिज़नेस का उदहारण बता रहा था। वह यह कमेंट सरकास्टिक लहजे में कर रहा था ,यहाँ उससे उस विशेष नेता की याद नहीं आई जिसे वह विशेष रूप से धन्यवाद करता नज़र आया जब महिलाओं के उम्र सीमा बढ़ा दी गई शादी के लिए।
तो आप सोचे कि क्या इसी कारन महिलाओं का प्रतिशत गिर रहा है नौकरियों में ? अब क्या घरवाले यह कहेंगे कि सीमा बढ़ गई तो हम पालन करेंगे ? बाल विवाह बंद हो जायेंगे ? बस इसी नियम के बनने के इंतज़ार में लाखों महिलायें नौकरी नहीं कर रही थी , बेरोजगारी दर , महँगाई , कोरोना का असर , पारिवारिक संरचना ,पितृसत्तात्मक सोच और आदि आदि कारन केवल भाषणों में अच्छे लगते हैं। समान अवसर और समान सोच मिले तो कुछ बात हो। फिर कुछ युवा कहना शुरू करेंगे कि आरक्षण क्यूँ है।
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