आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

विजय की परिभाषा

एक ही रास्ते पर सभी चले तो मुश्किल होगी ,इसीलिए कुछ पुराने रास्तों पर चलते हैं तो कुछ नए रस्ते बनाने में उम्र गुज़ार देते हैं। कौन सा किसके लिए अनुकूल है ,यह तय करना व्यक्ति विशेष का कार्य है ,समाजिक दखल लंबे समय तक कार्य नहीं कर सकती। फिर भी चारो ओर देखने पर ऐसा कुछ नहीं होता कि कुछ बदल रहा है ,पर वर्तमान में यूँ ही लगता है ,असल बदलाव भविष्य में या इतिहास में मिलता है। 


किताबे पढ़िए या फिल्म देखिये या सैर पर निकल जाइये ,नए साल में न जाने क्या क्या कर सकते हैं ,पर सुरक्षा के साथ करे तो बेहतर होगा ,तीसरी लहर की खबर आनी शुरू हो चुकी है कई देशों में ,कई जगहों पर चौथी लहर की खबर है। ठण्ड भी बढ़ चुकी है ,किस दिन बारिश हो जाए और किस दिन धूप ,कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे बदलते मौसम और बदलते समय में अनुकूल परिस्थिति तलाश करना मूर्खता है ,जो है सामने वही सच है ,और उसी में जितना मिल जाए वह आपका सच है। 


तमिल फिल्म जिसमे एक एयरलाइन शुरू करने के लेकर कितने परेशानियों से गुज़रना पड़ता है एक गाँव के लोगों को ,एक रूपए का टिकट ,और हवाई यात्रा। नामुमकिन सा लगने वाला स्वप्न यूँ ही होता है ,जिसे कोई विश्वास नहीं करना चाहता ,वर्त्तमान में घुल चुके लोग अपने मस्तिष्क को वर्तमान में ही रखना चाहते हैं ,क्या है वही सच है ,क्या हो सकता है वह कुछ लोग ही देख सकते हैं ,और वैसे लोगों का सहयोग करना समाजिक कर्तव्य है। 


साल का अंत कुछ नया करने को प्रेरित करता है ,आपके उम्र तक कुछ लोग रिटायर होकर नया कुछ शुरू करने की सोच चुके होते है ,और आप अपने ही दुनिया में व्यस्त है ,वैसे कौन कौन सी तुलनात्मक प्रतियोगिताओं में भाग लिया जाए।  एक ही कसम थी की कोई रेस का हिस्सेदार नहीं बनना है ,फिर भी दूसरों को देखकर स्वयं के कसम और इरादों पर शक होना लाजमी है। 


नए साल कुछ हो ,या ना हो ,हमारा रवैया कैसा होगा मुश्किलों के प्रति यह अधिक महत्वपूर्ण हैं। कहानी तो अभी शुरू भी नहीं हुई ,और लोग अंतिम पाठ पढ़ने को बेकाबू हुए जाते हैं ,उन्हें लगता है कोई खज़ाना मिल जाएगा या कोई ऐसी ख़ुशी मिलेगी जो कभी समाप्त नहीं होगी। पर ऐसा कतई नहीं ,कहीं कुछ नहीं छुपा। जो है उसे स्वयं को ही बनाना है। 


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