आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

बिखरते रिश्तों का सच

कठिन परिस्थिति में मित्रता की परख होती है ,तो क्या आसान परिस्थिति में मित्रता का क्षय होता है ? नहीं। सभी परिस्थितियों की अपनी महत्ता है और वह अपने गुण दोष साथ लिए चलते हैं ,पर इसकी समझ मनुष्य को वर्तमान में नहीं बल्कि भूत काल में समझ आती है ,इसीलिए राह पकड़ तू एक चला चल मिल जायेगी मधुशाला। कल रात नींद नहीं आ रही थी तो एक किताब उठा ली जिसे ख़त्म करने के प्रयास पिछले साल से ज़ारी हैं ,संकल्प था कि पिछले साल के दिसंबर में ही उसे समाप्त कर दिया जाए ,पर ऐसा हो न सका और अब इस नए साल में दूसरा महीना समाप्त होने को है ,हाँ मगर पढ़ने की गति में अंतर जरूर हुआ है ,और ऐसा संकल्प के पुनर्गठन पर हुआ है ,जैसे सरकारे अपनी पंचवर्षीय लक्ष्यों को टरकाते टरकाते सदियाँ पार कर देती हैं। 


कल लता मंगेशकर का निधन हो गया ,एक महत्वपूर्ण काल खंड में अमूल्य योगदान हैं उनके जिसको आने वाली पीढ़ियाँ याद करेंगी ,उनके गीत सदियों तक गूँजेंगे , उनकी राजनीति  को लेकर कई लोगों में मतभेद था ,मगर उनके सुर और कला में किसी कोई शक नहीं था ,आज़ादी से पहले से लेकर आज तक उन्होंने लाखों गीत कई भाषाओं में गाये ,सभी उम्र वर्ग के अपने चहेते गीत हैं जिसे कल दिन भर लोग सोशल मीडिया पर शेयर करते रहे जैसे लोग बस इसी का इंतज़ार कर रहे हों। मगर ऐसा नहीं है ,वह इन गीतों को साझा अपने प्रेम प्रदर्शित करने के लिए कर रहे थे। 

 

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट्स १८८१ के तहत महाराष्ट्र में सोमवार को छुट्टी घोषित की गई लता मंगेशकर के निधन पर ,यह एक्ट्स १८८१ अभी तक चला आ रह है और जाने कितने और वर्षों तक चले। कल रविवार के चलते मूर्ति दहन का कार्यक्रम भी नहीं संभव हुआ ,वसंत ऋतू का आगमन हुआ ,सरस्वती पूजा रात के दो बजे तक फ़िल्मी गीत बजाकर मोहल्ले में मनाई गई ,नृत्य कला में पारंगत युवा पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लेकर संतुष्ट हैं। 


कल पनीर बनाने का प्लान था ,मगर मटर और पालक में लड़ाई हो गई ,तो पालक दिन में ही चट कर गया मैं ,मटर बाज़ार से आ ही न सका ,और अब बेचारा पनीर अकेले किचन में बैठा है। कल गाजर के हलवे को केला और अंगूर का हलवा बनाकर पकवान शास्त्र कला में निपुण का परिचय दिया मैंने। दोपहर में दाल में चार आलू डालकर ,फिर दाल को फ्राई कर उन्ही आलुओं के साथ एक नई डिश का भी ईज़ाद किया जिसके नामकरण को लेकर अभी कुछ तय नहीं है ,मगर दाल आलू फ्राई या फ्राई दाल आलू ,इन्ही दोनों के बीच में किसी एक को मौका मिलने की उम्मीद है।  


“नाईटमेयर एले “ फिल्म देख रहा हूँ , गुलिएरेमे देल टर्रो द्वारा निर्देशित यह फिल्म में प्रसिद्ध कलाकार कैट ब्लैंचेट , रूनी मारा , ब्राडली कूपर ,विलियम डेफो आदि हैं, १९३० -४० के अमेरिका के समय में यह कहानी निर्मित है जिसमे कूपर एक साइकिक के रोल में है वही ब्लैंचेट एक डॉक्टर हैं ,और रूनी मारा कूपर की पार्टनर हैं उसके शो में। फिल्मांकन बहुत विश्वसनीय है ,सचमुच उस समय काल में पहुँच जाता है दर्शक ,अंत बेहद रोमांचक है ,सभी किरदार कुछ न कुछ छुपाये हैं ,और अपनी अपनी चाल चल रहे हैं ,उन्हें एक दूसरे से आगे निकलना है ,अब अंत में पता चलेगा कि कौन सबसे तेज़ है ?


अलविदा 


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