परिस्थितियों के यात्रीगण
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चिंता सताए तो तारे नज़र आये ,ट्रैन टेम्पो की भाग दौड़ से बचना मुश्किल है इस मौसम में ,शाम से बारिश शुरू हुई जो रात भर चली ,बादल और बिजली साथ केवल आसमान में दिख सकते हैं क्यूँकि जैसे ही बारिश शुरू हुई घर की बिजली ने अलविदा कह दिया। अब सहारे कौन है , युद्ध छिड़ चूका है ,एक देश ने दूसरे देश पर हमला बोल दिया है ,ट्विटर पर ज्ञान बाँटे जा रहे हैं ,अख़बारों में छप रहा है हाल ,चुनाव के माहौल हैं राज्यों में। जब चुनाव होता है तो सभी मंत्री कार्यकर्त्ता बन पर्चे बाँटना शुरू कर देते हैं।
जो धन राशि कुछ महीने पहले बहुत थोड़ी लगती थी ,वही आज बहुत अधिक लगती है ,जो जॉब बकवास लगता था वही आज अच्छा लगने लगता है ,मगर कहीं न कहीं तो शुरुआत करनी ही है तो लोग करते हैं शुरुआत ,और फिर सोचने लगते हैं भविष्य के फैसले और खो चुके मौकों के बारे में ,क्या हो सकता था पर अधिक सोच विचार करते हैं बजाय इसके कि क्या हो सकता है ,पर क्या करे पीछे मुड़कर देखने में अधिक आनंद है ,बीते कल का अलग रोमांच है जिसे हर कोई हासिल करना चाहता है। जो स्वप्न मन में है वह सुखद है और उसी कल्पना में सदैव डूबे रहने का हासिल यह है कि वर्तमान का हाल और दुखद होता चला जाता है ,और अंत में केवल सपने रह जाते हैं।
मित्रों से मदद अजीब प्रक्रिया है , सबको आती नहीं और हमारी जाती नहीं ,इसीलिए दूर खड़े जैसे दूसरे हरकत करते हैं उनमे से कुछ बिंदुओं को चुनकर एक नया रूप देने कोशिश हर नए मौके पर की जाती है। अंत घडी जब आवे ,कोहु सच न बतावे वाली कहावत का सहारा लेकर झूठ की फैक्ट्री लग चुकी है हर शहर में। तय करना मुश्किल है की लोग क्या करेंगे। इतिहास हमने पढ़ा नहीं और भविष्य में कोई रूचि नहीं ,तो वर्तमान को जिस मक़ाम पर लेकर जा सकते हैं वहां तक ले जाने की कोशिश में भीड़ जुटाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
अलविदा
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