आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

महत्तम -लघुत्तम के आँकड़े का खेल

चौरा -चौरी कांड १९२२ में हुआ था ,आज २०२२ है ,असहयोग आंदोलन रद्द कर दिया गया था इस कांड की वजह से ,बहुत करीब थे आज़ादी के मगर बहुत दूर हो गए ,कौन सा रास्ता अपनाते हैं अपने लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि लक्ष्य को हासिल करना ,यह बात शायद आज के समय में कुछ सटीक नहीं बैठती हो मगर यह बात आज भी इतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी १०० वर्ष पहले थी। ईमानदारी और सत्यता की पहचान समय के हिसाब से नहीं बदलते वह सूरज और चन्द्रमा के तरह अटल सत्य हैं ,बाज़ार में मोल भाव भले कम मिले मगर अन्य क्षेत्रों में उसकी अहमियत है।  


पिछले कुछ वर्षों में यह आभास होना शुरू हुआ है कि आप कितने किस्मत वाले हैं ,कोरोना में लाखों लोग जान गवाँ बैठे , कितनों के रोज़गार छीन गए ,तो कइयों के व्यपार में भारी नुकसान हुआ ,आप सही सलामत हैं तो दूसरों की मदद करे ,जहाँ हैं जितना है वही काफी है ,यह संतोष का भाव ही कमाई इस महामारी की ,वैसे यह भाव बहुत कष्टों से गुज़रने के बाद मिलता है ,पर मिलता ज़रूर है सबको जीवन के किसी न किसी मोड़ पर। 



कल दिन भर बिजली गुल रही ,बाहर बारिश हो रही थी ,एक टोर्च को कमरे के भीतर जलाये दिन बीता ,रात के करीब ८ बजे बिजली आई तब जाकर बर्तन धुले और भोजन बन सका ,तो क्या दिन भर उपवास ही रहा ,कुछ वैसा ही समझिए। कल एक और घटना हुई ,दो फिल्म निर्देशकों के बीच का कन्फ्यूज़न दूर हुआ  जिनकी पहचान कई महीनों से मैंने एक कर दी थी। एक फिल्म है “mad मैक्स “ जिसने निर्देशक हैं जॉर्ज मिलर जो ऑस्ट्रेलिया के हैं ,वही एक फिल्म है “the मार्टियन “ जिसके निर्देशक हैं रिडली स्कॉट जो इंग्लैंड के हैं और जिनकी और फ़िल्में  हैं एलियन ,हाउस ऑफ़ गुक्की ,ब्लेड रनर आदि। स्कॉट के पिता अंग्रेजी फ़ौज में थे और द्वितीय विश्व युद्ध में लड़े ,स्कॉट के बड़े भाई भी मर्चेंट नेवी में हैं। बचपन से उनके पिता परिवार से गायब रहते थे अपने नौकरी के कारन और बच्चों को पालने का सारा ज़िम्मा स्कॉट की माता एलिज़ाबेथ पर था। अपनी फिल्मों में मजबूत महिला किरदार के लिए भी जाने जाते हैं स्कॉट ,और इसी से जुड़े सवाल पर उनका कहना था कि उनकी माता उनकी पहली रोल मॉडल थी एक सशक्त महिला की और जो वो कहे वही हम दो भाइयों के लिए कानून होता था। ३००० से अधिक फिल्म कमर्शियल निर्देशित किये हैं स्कॉट ने ,और इसी अनुभव को वो फिल्म स्कूल बताते हैं ,१९७७ में पहली फिल्म निर्देशित की थी ,और २०२१/२०  में उनकी तीन फिल्मे आयी हैं ,१९३७ में इनका जन्म हुआ है ,इतनी उम्र के बावजूद इतना कार्य काबिले तारीफ है। 



Popular posts from this blog

कोरे कागज़ का सफर

किस्मतों के बुलबुले शर्म में सड़ गए

प्रलापी बूँदों के प्रवासक