आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

घर पहुँचाने की जल्दी


कल घर निकलना था ,इसीलिए रात को जल्दी सोने की कोशिश की ,मगर नींद की भी अजीब बीमारी है ,अक्सर स्कूल में जब सुबह जल्दी उठना होता था तो नींद देर से खुलती थी और जिस दिन स्कूल की छुट्टी हो उस दिन सुबह अपने आप नींद खुल जाती थी और फिर यह नहीं समझ आता था कि अब करे क्या ? क्या इसका कारन मानसिक तनाव है ? तो सुबह घर निकलना था तो जल्दी सोने का प्रयास किया पर नींद नहीं आई , फिर थोड़ी देर किताब के पन्ने पलटने का नाटक किया और बेवकूफ दिमाग समझ गया कि अब उसका इस्तेमाल किसी लाभकारी कार्य में उपयोग होगा ,इसीलिए उसने हार मान ली ,अगर यही मैं इंस्टाग्राम पर तैरना शुरू कर देता तो मेरी हार होती और सुबह मेरी ट्रैन छूट जाती। हाँ ,मगर पन्ने पलटने के नाटक ने नींद तो लाई ,मगर ऐसी गहरी कि वो सुबह ट्रैन खुलने के ठीक १० मिनट पहले खुली। 


अब १० मिनट में नित्य कर्मों को निपटाकर स्टेशन पर पहुँचना नामुमकिन सा लगा ,मगर हॉस्टल वाले बच्चे तो पाँच मिनट में साल भर का सिलेबस रिवाइज कर लेते हैं परीक्षा कक्ष  के बाहर खड़े होकर घंटी बजने के पहले ,तो समयानुसार क्रियाओं में अभूतपूर्व परिवर्तन का सहारा लेना पड़ता है। स्टेशन पर पहुंचकर मालुम हुआ ट्रैन १० मिनट लेट है ,अब इसे कहते हैं किस्मत ,आस पास कई परिवार पहले से ही ट्रैन के इंतज़ार में बैठे हुए थे ,कोई जलेबी खा रहा था तो चिप्स तो किसी बच्चे के टोपी में दो गुब्बारे बाँध दिए थे किसी ने। एक व्यक्ति फ़ोन पर बता रहा था कि वह अपनी पत्नी को ट्रैन पर बिठाने स्टेशन आया हुआ है , और उसकी पुत्री की तबियत ख़राब है जिसे आज उसे डॉक्टर के पास लेकर जाना है दिन के ११ बजे ,तो इसीलिए वह सभा में शामिल नहीं हो पायेगा।  यह सभा शायद किसी राजनितिक महोत्सव के लिए आयोजित की जानी थी ,अपनी कार की चाभी कमर में लटकाये वह प्लेटफार्म के इस छोर से उस छोर से मनगढंत कहानियाँ बनाता हुआ चक्कर काट रहा था.


ट्रैन आई ,तो सफर शुरू हो गया। सर्दियों में हरी सब्जियाँ अधिक मिलती है ,तो स्कूल में सर्दियों की छुट्टी के पहले एक शिक्षक सदैव विभिन्न प्रकार के पराँठों की जानकारी साझा करते थे हमारे क्लास में ,उत्सव का माहौल हुआ करता था छुट्टी के दिन ,हम क्लास के बोर्ड पर कितने दिन बचे हैं घर जाने को, उसकी सँख्या भी अंकित किया करते थे अन्य जानकारियों के साथ साथ। 


आज सब्जियाँ भी हैं और सफर भी , मगर वह उत्साह नहीं है। 


अलविदा /. 


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