आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

निरक्षर का प्रतिशोध



कितनी बार पुकारा तुझे ,तेरे नाम के सदके लिखे हैं ~ यह गीत अचानक आज याद आया ,दिन के पहर को भाव में बाँट दिया गया है ,सुबह कोई उदास दिखे तो लोग बेचैन होने लगते हैं ,वैसे शाम तक उनकी भी हालत वही होने लगती है। जो आपको चाहिए वह नहीं मिले तो जो सामने है उसी में ख़ुशी तलाश कर लेना बुद्धिमानी है ,अब यह बुद्धिमानी का परिचय बचपन से देते आये हैं। एक किस्सा याद आता है स्कूल का , क्लास में सो रहा था , सो क्या रहा था मगर चलिए मान लेते हैं कि सो ही रहा था , तो शिक्षक ने कहा कि बैठ कर सोने में परेशानी हो रही है तो क्यूँ नहीं फर्श पर आराम से लेट जाते हो , सुनने में थोड़ा अजीब लगे पर सुझाव बुरा नहीं था , हाँ मगर मैंने मानने से इंकार कर दिया और चुपचाप खड़ा होकर उनकी तरफ देखता रहा ,अब उन्हें इस बात का गुस्सा आया कि यह बेवकूफ इतने बेहतरीन सुझाव को नहीं मान रहा तो आगे चलकर मेरे कई और सुझाव नहीं मानेगा इसीलिए ईलाज इसी समय करना आवश्यक है ,तो ईलाज के प्रथम चरण में उन्होंने अपने कलाई की घड़ी उतारी जो वह अपने बाँये हाथ में पहना करते थे ,वह बाँये हाथ से लिखा भी करते थे बोर्ड पर। उनके घडी उतरने के क्रम तक मुझे चिंता हुई ,क्लास ख़त्म होने की घंटी बज चुकी थी ,तब मैंने सोचा कि अब इनका घडी उतारना क्या इशारा करता है ,यही सब सोच रहा था कि थप्पड़ों की बरसात होने लगी ,और यह समझ पाता कि यह सब अचानक कैसे हुआ तब तक मैंने स्वयं को फर्श पर लेता हुआ पाया और अगली कक्षा के शिक्षक के चिंतित चेहरे पर नज़र पड़ी ,तब उन्होंने ने सवालों की झड़ी लगा दी। कहा कि इतनी नींद आ रही है वह भी इतनी सुबह सुबह इसका मतलब तुम्हे नींद की सख्त ज़रूरत है ,और तुम इसकी भरपाई करने के लिए प्रधानाचार्य के पास आवेदन करो। एक शिक्षक के सुझाव को नकारने का लाभ मिल चूका था ,अब दूसरे शिक्षक के सुझाव से स्वयं को वंचित नहीं कर सकता था मै ,तुरंत आवेदन पत्र तैयार कर प्रधानाचार्य के ऑफिस पहुँच गया। वहाँ पहुँचने पर ज्ञात हुआ कि कतार बहुत लंबी है ,इसीलिए मेरा नंबर आते आते दोपहर के भोजन का वक़्त तो हो ही जाएगा ,इसीलिए कतार में शामिल होकर मैंने नींद की भरपाई करनी शुरू की और आगे वाले से सज्जन से समझौता किया कि जिसे भी पहले भोजन की घंटी सुनाई दे वह दूसरे को इत्तिला करे। तो ,रात की नींद सुबह कक्षा से होते हुए दोपहर तक जाके प्राप्त हुई।  



दोनों शिक्षकों के अलग अलग ईलाज का लाभ देखकर मेरे मित्र बेहद प्रसन्नचित थे उस दिन ,और उनकी खुशी का अनुभव आज भी सुनने का अवसर प्राप्त होता है मुझे ,अब शायद यह अनुभव अगले जन्म में मिलेगा ,ऐसी आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है मुझे। 

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