व्यक्तित्व का अंतर्द्व्न्द
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एक व्यक्ति से मिलकर उदासी छा जाती है ,वही दूसरे से मिलकर नयी संभावनाओं की रौशनी नज़र आती है ,तो अंतर कहाँ छुपा है ,वहाँ या यहाँ। अब इसकी तलाश ज़ारी है ,पर जब तक इसका उत्तर मिले ,क्यूँ न ऐसे ही लोगों से मिला जाए जो रौशनी की सैर करते हों ,मगर क्या यह सही राह होगी ,केवल एक रंग से दुनिया रंगहीन हो जाती है ,विविधता ही पहचान है जीवन का ,और इसी विविधता को बनाये रखने के लिए अनेकों प्रयत्न किये हमने जीवन भर। अब इसे यूँ मिटता देख नहीं सकते। तो भले कुछ हासिल हो या नहीं दुनियादारी की नज़र अगर यह विविधता बरक़रार है आस पास तभी बगिया महकेगी।
कल कुछ नहीं बन सका तो बारिश फिर होने लगी ,यही सोच कर एक मित्र से बात करने का मन बनाया ,मगर बारिश को यह मंज़ूर नहीं था इसीलिए बात नहीं हो सकी. पडोसी अंकल बहुत दिनों बात घर लौटे हैं ,और कल मिलते ही सुबह मेरे बढ़ते दाढ़ी के बारे में चिंता ज़ाहिर करते हुए एक राजनीतिक नेता के दाढ़ी से तुलना कर डाली। इस सवाल का कुछ उत्तर देना स्वयं को आग के मुँह में डालने कम नहीं ,मैंने केवल बनावटी मुस्कान का सहारा लेते हुए वहां से बच निकलने में ही अपनी भलाई समझी ,मगर अंकल इसके लिए तैयार नहीं थे बावजूद इसके कि वह बाइक पर सवार होकर अपनी पुत्री के साथ किसी कार्य से बाज़ार की ओर निकल रहे थे। अगला सवाल उनका कि आखिर यह दाढ़ी कब कटेगी ,मैंने कहाँ जब तक सर्दी और बारिश है तब तक अपने आलस्य के चँगुल में कैद हूँ मैं, मगर ग्रीष्म ऋतू में यह लाभकारी कदम उठाना ही पड़ेगा। इसके पहले कि वह तीसरा सवाल फेंके ,आंटी के आदेश ने उनको अपने कर्म की याद दिलाई। मेरे पीछे मुड़ने के पहले ही उनकी बाइक सड़क पर दौड़ती नज़र आई।
बिजली गुल हो गई रात में ,बाकी घरों में बिजली मौजूद थी ,यह अन्याय सहन नहीं कर सका मेरा भोला मन ,इसीलिए मैंने सबको कोसना शुरू कर दिया ,पड़ोसियों को गाली दी ,घर के बाहर निकल प्रबुद्ध जनों को ललकारा ,मगर इसका कोई असर नहीं हुआ ,रात भर बिन बिजली के ही गुज़ारना पड़ा ,केवल बारिश के बूंदों का सहारा था ,सुबह एक सज्जन अवतरित हुए और बिजली ठीक करने का दावा किया ,अब उनके दावे की पड़ताल हो सके उसके पहले ही उन्होंने कहा कि आपका अदम्य साहस ने असर किया और सुबह से ही सबके घरों में बिजली गुल है ,इसिलए आप इंतज़ार करे आपके साथ न्याय हुआ है ,जब सबके घर बिजली आएगी तब आपके घर भी आ ही जायेगी ,तब तक आप जश्न मनाईये और मुझे चाय पिलाइये ,मैंने कहाँ रसोई गैस अब सोने के दूकान पर मिलता है ,इसीलिए बिजली ही एक सहारा था भोजन तैयार करने का। उस सज्जन ने हार नहीं मानी ,उन्होंने कहा यह कौन से बड़ी बात है ,पास के कई दुकान खुल चुके हैं चलिए आप भी वहीँ चाय पि लीजिएगा। अब उन्हें यह कैसे बताऊँ कि उन दुकानों में पहले से ही मेरे क़र्ज़ हैं ,मेरी परछाई भी नज़र आ जाने पर वह गुरिल्ला वॉर शुरू कर देंगे। तो चुपचाप कुदरती चमत्कार का इंतज़ार करने लगा मैं।
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