आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

कहानी लम्बी न हो, फ़िक्र नहीं। मज़ेदार हो , भले ज़िक्र न हो



१ 
कर्तव्य किसका है कहर ढाना , आना इधर तो,  एक बार ज़रूर आना 
व्यर्थ है बातों का मतलब निकालना,  कुछ न कहना,  बस लिखते जाना  
२ 
उद्देश्य परिवेश के आधार पर बदल गए , सब आये,  मगर गुज़र गए 
आमदनी की ही अगर होती चिंता , होते कबके हम सुधर गए 
३ 
परिभाषायें अच्छी बनाते हो , करते नहीं कुछ,  बस बताते हो 
डर था , जब मौत आई थी मिलने ,  अब मगर क्यों घबराते हो 
४ 
शब्द हर भाव के लिए खोज लेते हो , आदमी काम के हो 
परिचय तो नहीं किसी से , रिश्ता मगर सबसे जोड़ लेते हो 
५ 
कहानी लम्बी न हो,   फ़िक्र नहीं  
मज़ेदार हो ,   भले ज़िक्र न हो 
हर कोई है देवता ,  यकीं भले न हो 
६ 
एक कहानी रोज़ दुहराई जा रही  , बात पुरानी फिर याद आई 
ख़त्म होगा कब सफर अपना , तरस राहगीरों को भी मुझ पर आई 
७ 
हर वक़्त बेचैनी का दौर है , उम्मीद तो है , मगर कोई ठौर नहीं 
कटता  है हर पल ऐसे  , जैसे अगला पल  है अंत, आरंभ नहीं 



८ 
कुछ की आदत नहीं थी , बहुत का ख्वाब नहीं था 
मंज़िल मिली तो कहने लगी , सफर कोई ख़ास नहीं था 
९ 
आप से लड़ाई है , बुरा नहीं हूँ , चारो तरफ  मगर बुराई 
तकिये के नीचे संदूक की चाभी है , चोर हूँ , सिपाही नहीं 
१० 
किसका जवाब कैसे जाने , कोई अन्तर हो तो बताये 
परिचय अपना पहले बताये , फिर अंदर प्रवेश पाये 
११ 
अचानक आदमी गिरा ज़मीन पर , थका था , या मरा  था 
सोचता क्या है इतना ,उसने कुछ कहा था , या नहीं कहा था  
१२ 
इंसान अपनी भूल छिपाता है , समय से पहले मर जाता है 
कभी नहीं उसने मेरी बात मानी , अब क्यूँ बेचैन हुआ जाता है 

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