उम्मीदों के बहाने
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हिंदी गीत सुन सुन कर कई ख्याल बनाये ,होली में पडोसी ने स्वादिष्ट पकवान भेंट की ,उन पकवानों की तारीफ भी नहीं कर सका उनके सामने ,आंटी कल शाम इवनिंग वॉक पर दिखी थीं ,पर जब मौका बीत गया तब यह ख्याल आया कि तारीफ़ करनी चाहिए थी ,क्योंकि वाक़ई तारीफ़ करने लायक पकवान थे ,अंकल ने कहा की पडोसी का धर्म निभाने आये हैं वह ,और फिर थाली परोस कर लौट गए , रात्रि भोज को स्थगित कर पकवान का आनंद लिया गया ,यूँ लोगों ने होली दो दिनों तक मनाई ,वाक़ई क्या साल रहा जहाँ दो दिनों तक होली मनाने का मौक़ा मिला शायद पिछले सालों की भरपाई हो रही थी.
गर्मीं बढ़ चुकी है ,कल एक कूलर भी बाज़ार से खरीद लाया जिसमे पानी भरने के लिए पाइप पडोसी से माँग कर काम चलाया। अब पाइप खरीदने की बारी है। जैसे ही पाइप ख़रीदा तो पडोसी की पाइप वापस कर दी जायेगी। आम के पेड़ों का हाल पिछले पन्नों में लिख चूका हूँ ,नए पत्ते आ चुके हैं और पुराने सूखे पत्तों से आँगन और रास्ते भर चुके हैं। बाँस का पेड़ सामने वाले के बगीचे में हैं और सूखे पत्ते से पूरा रास्ता भर चूका है ,कल देखा किसी ने आग लगा दी थी सूखे पत्तों में। वही दूर एक पीपल का पेड़ है जो पूरी तरह वीरान लग रहा है बिना पत्तों के ,सारे पत्ते झड़कर गिर चुके हैं मगर पेड़ खड़ा है ,शायद उसे मौसम बदलने का इंतज़ार है आखिर इतने वर्षों से कई मौसमों को झेल चूका है.
कल लौकी के कोफ्ते बनाने की रेसिपी यूट्यूब पर देखी ,अब देखने का क्या है ,मगर जब बनाने की बारी हुई तो ,बीच राह में ही हिम्मत टूट गई ,तो एक नई रेसिपी को जन्म दे दिया ,अब नई तो नहीं कह सकते हैं मगर मेरे द्वारा प्रथम बार बनाई गई इसीलिए मुझे नई लगी। लाल साग भी बनाई जो रात तक चली।
चुनाव के परिणाम आ चुके हैं ,लोग हर्षोल्लास में होली भी मना चुके हैं ,और अब एक नए पर्व का इंतज़ार हो रहा है ,अब पीने के पानी की किल्लत होगी गर्मी में कई स्थानों पर और फिर आम का स्वाद से गर्मी काटने का इंतज़ार किया जायेगा।
कल शाम एक करीबी मित्र ने एक खुशखबरी साझा की. ऐसे ही मित्रो की तलाश सदैव रहती है जो खुशियों का प्रचार प्रसार करते रहे ,निजी समाचार या समाजिक त्यौहार ,हर व्यवहार में शरीक होना मानवता के अभिन्न अंगों का हिस्सा है। अब फ़ोन के करीब बैठकर करीबी मित्रो का इंतज़ार करता हूँ।
धन्यवाद
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