एहसानों का आतंक
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कुछ बोल नहीं पाते हैं जब मित्र सलाहकार का रूप धारण कर ज्ञान की मटकी उड़ेलना शुरू कर देते हैं ,चुपचाप सुनते हैं और मन ही मन सोचते हैं आखिर कौन सी घडी जाकर यह विवेचना समाप्त होगी ,पर वह नहीं होती है , मित्र आपकी कमियों को दोहराता है और सलाह का पिटारा उस दिन के लिए बंद कर देता है. आपके मानसिक संतुलन का ख्याल होता है उसे ,इसीलिए दवाई की सारी घूँट एक ही दिन पी लेने से बिमारी एक दिन में समाप्त नहीं होती ,दवाई कितनी भी असरदार और महँगी क्यूँ न हो।
सुबह ४ बजे बाहर अँधेरा था ,रात तो बल्ब ऑन कर सोया था ,फिर क्यों अँधेरा हैं ? मगर अभी सुबह के चार बज रहे थे इसीलिए गैर ज़रूरी मुद्दों को स्वीकारना अन्याय है। सुबह नौ बजे दरवाजे से घर के बाहर निकला तो देखा पर्दा और बल्ब दोनों गायब हैं ,किसी ने पर्दा चुरा लिए मगर उसकी रस्सी नहीं चुराई बल्कि खींच कर तोड़ दिया ,बल्ब भी चुरा लिया। बगल के घर का पर्दा और बल्ब सही सलामत था ,इसकी जानकारी आंटी ने दी ,और मेरे घर के परदे चोरी होने पर आश्चर्य जताया ,मगर ऐसा पहले भी होने की एक छोटी कहानी सुनाई ,तब मैंने भी उन्हें ऐसा वारदात होने की एक छोटी कहानी सुनाई। इन्हीं कहानियों के वाचन से अपने दुःख को कम करने की कोशिश बेकार हुई।
गर्मी थोड़ी थोड़ी बढ़ी है ,ठंड घटती जा रही है ,दिन और रात पर उसका अधिकार खत्म होता महसूस हो रहा ,गर्मी और ठण्ड के इस मिलन को क्या कहते हैं ? रात्रि में पंखे चले कि न चले ,रजाई ओढ़े या न ओढ़े , ऐसे कई सवालों में उलझा मानव आनेवाली गर्मी में सबसे खूबसूरत चीज़ के सपने देखता है। सोचता है कि इस साल कितने प्रकार के आम का स्वाद लिया जा सकता है। इंस्टा पर अभी से बुकिंग शुरू हो चुकी है आम की।
रात भर पड़ोस में कार्यक्रम चलता रहा, गीत संगीत के साथ कई प्रतियोगिताओं का भी आयोजन होता मालुम पड़ता है , वहाँ उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं ,स्पीकर लगे हैं जो चीख चीख कर सारी जानकारी आपके मनोक्षेत्र में दर्ज़ कराते जाएंगे ,भले उसका इस्तेमाल कोई करे अथवा नहीं।
चुनाव में कैसे कौन से मुद्दों से लाभ लिए जा सकता है ,इसके लिए विदेशी /देशी विश्वविद्यालयों को शोध करना चाहिए ,नए नए मानवीय गुणों से रूबरू होने का अवसर प्राप्त हगा।
अलविदा
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