उदयाचल का सिंहासन
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१.
निर्मित सच की मिठाई
बड़े चाव से मैंने खाई
२
उद्घोष सच का सुन न सका
कलापुष्प कहीं खिल न सका
३
आवेश में सच के साथ हो लिए
सामना हुआ तो मूर्छित हो गए
४
द्वेष निवेश मनुज बढ़ता
सुनता सच झूठ बकता
५
घिरे आँधी और तूफ़ान के बीच
हम -तुम बादलों में घर बनायेंगे
६
अकस्मात पीड़ा न हुई होती
बीमारी छूट जाती मौत आती
७
हृदय परिवर्तन तक रुक जाना
मेघ लहरायें तब आवाज देना
८
मेघदूत का नाम सुना था
हृदय मजबूत किये बढ़ता रहा
९
जो सामने है
उसकी नहीं तलाश
आँखें खुली हैं
कुछ दीखता नहीं
बढ़ते रहने की आकाँक्षा
मक़्तल पर खत्म होगी
१०
पुर्जा पुर्जा जोड़ कर एक विचार बनाया
जब लोगों को सुनाया
उन्होंने शांति प्रेम से धमकाया
निज स्वार्थ के भाव में खोकर
सच को मैंने
एक बीड़ी में जलाया
११
अवस्था क्या है मानव की
कुछ पाने की
फिर
कहीं खो जाने की
जब कुछ न सूझे
तो पडोसी के घर आग लगाने की
सच यह है मानव जन की
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