असली लाश कौन हैं
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१
मूकदर्शक हूँ इस समाज का
क्रूर कृत्यों पर नृत्य करता हूँ
शर्मशार मानवता होती जिन घटनाओं से
रोज़ उन्हें दोहराता हूँ
कोई तुम्हारा न विघ्नहर्ता
जो करता वो मैं करता
२
टूट चुकी सब मर्यादायें
जश्न हम मनाते हैं
हाल अपना जानकर भी
रोज़ मरने जाते हैं।
३
कैसे सच मान ले इस घटना को
लिख दिया एक पैन
४
एक लाश चिता पर जलती है
चारो ओर घेरा है पुलिस का
परिजन बंद कमरों में बिलखते हैं
लोग घर बैठे चिंता ज़ाहिर करते हैं
हम दोषी किसको कहे अपने वध का
वो जिसने हमे बेजुबां किया
या जिसने हमारा अधिकार छीना
या वो जो दूर खड़ा मेरे चिता पर मुस्कुराता है
मुझे एक बला के सिवा कुछ नहीं मान पाता है
किसको कहे हम दोषी
जिन्हे पुलिस ने पकड़ जेलों में डाल दिया है
या फिर वो
जो हँसते रहे मेरे घाव को देखकर
अब मर चुकी हूँ मैं
पर मुझसे पहले तुम लोग सब मर चुके हो
ये समाज
ये लोग
सब ज़िंदा लाश हैं केवल ,और कुछ नहीं
५
फ़र्ज़ी मुकदमों में जिन्हे फँसाया जाता है
जाति के कारन जेलों में सड़ाया जाता है
मैं हूँ कौन
न हूँ पुरुष और न उच्च जाति
मुझे हर जगह दफनाया जाता है
६
आओ और खुशियाँ मनाओं
कि तुम्हारी जीत हुई
मुझसे पहले कितने आये
मुझसे बाद कितने आयेंगे
गौरवगाथा लिखी जायेगी
सदियाँ पढ़ न पायेंगी
क्योंकि
तुमने उनको अनपढ़ रखा
अधिकारों से वंचित रखा
बंद हैं अधिकार क़ानून के किताबों में
यह किताबें केवल धन और बल पर खुलती हैं
इन्हे हर कोई नहीं पढ़ सकता
और पढ़ भी ले तो कुछ नहीं कर सकता
७
यह केवल शब्द हैं
जो खोखलें है
बिलकुल तुम्हारे भाषणों की तरह
दुःख और उत्पीड़न की स्वर्णरेखा
हमारे ओर हीं क्यूँ मुड़ती है
मर चुके मानवों को ही क्यूँ मारती हैं
८
हालचाल अब न पूछिए जनाब
लाश दफनाने का काम मिल गया हमको आज
रात के अँधेरे में ,छुपकर और बचकर
जो मर चुके हैं उनको मारने का काम मिल गया जनाब
कोई न हमसे पूछ सकता क्या काम हमको मिल गया ज़नाब
राज्यों के जंगलों में भेड़ियों को समझाया
कि जो किया सो ठीक था
पर इतना हंगामा हुआ कैसे जनाब
९
असली लाश कौन हैं
वो जिसे रात में चुपके से दफनाया
या वो जिसे उच्च जाति ने धमकाया
जुबां दोनों में चुप थी
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