आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

मन बदला न जीवन जन जन है मज़बूर


१ 
नित तड़पत मन जगे है शंका बहुतेरे 
सचहूँ कहत चिरैया दिन बचे है थोड़े
२ 
घोर पाप की नगरी में हमहुँ एक तारा 
शोक मनावत है अब तलक एक राधा 
३ 
बोझ ढ़ोअत अकेरे जन बुझत नाही कोई खेल 
इहा विकास होइ तब जभहु हुई आपस में मेल
४ 
कहत सुनत जनपद रोज़ इक फरमान 
डाले काहे गलती अपनी पर पर इंसान
५ 
भोग विलास के लत लागी  दुनिया गई भुलाए 
अब पूछत हुअन पता आपन कोई नाही बताय
६ 
काली के है रूप अनगिनत जग गिनती जाए भुलाय 
माली पूछे फूलन से आज किसकी जान बचावे जाए 
७ 
राम रहीम सब बसे होये भीतर 
झाँका न कबहुँ बन रहा तीतर 
८ 
निंदक के परछाई से भाग रहा कोसो दूर 
मन बदला न जीवन जन जन है मज़बूर
९ 
जनक कोहु कहीं नाही है जग झूठा पहचान सिखाय
जननी पूजत तो जगत मिले बाकी मोह के अध्याय 
१० 
ज्ञान बांचे सबहुन को खुद में डूब न पाए 
गुड़ पीछे मारे फिरत मिरच से मुह बचाय 
११ 
ज्ञान  गंगा अबहुँ बहत जे खोजे ते मिल जाए 
कर्ण के सा ज्ञानी  जग में अब मिल न पाय

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