सब चुप घरों में टीवी पर ड्रामा देखते हैं
- Get link
- X
- Other Apps
१
दोषी किसको कहे अपने वध का
किसके चिता पर ये समाज रोता है
कौन मुखर हो सवाल पूछता है
कैसे जाति व्यवस्था स्वस्थ रहती है
किसके पोषण से ये जाति पलती है
मानकर सब हम विश्वास करते चले
मरते रहे फिर भी कोर्ट के दरवाज़े खड़े
२
झूठे आरोपों में फँसाया जाता है
जाति पर हमे सताया जाता है
सब चुप नज़ारा देखते हैं
पीड़ित को दोषी करार देते हैं
३
मुद्दे हम भटकायेंगे , आपस में लड़वायेंगे
तंत्र हमने ख़रीद लिया ,सबको अब डरायेंगे
यह खेल मेरे हाथ आया है अब
सबको मज़ा चखाएँगे
४
मृत आत्मा पुकारती है
दोषियों को दुत्कारती है
५
अंतिम सम्मान भी दे न सका
वो समाज नाकारा है
वो तंत्र नाकारा है
सदियों के ज़ुल्मों का चित्र
एक घटना ने उभारा है
६
क्योंकि तुम महिला हो
सब ज़ुल्म तुम्हे सहना है
सब आतंक तुम्हे स्वीकारना है
सब आरोप तुम्हे मानना है
क्योंकि तुम महिला हो
सब कार्य तुम्हे करना है
बदले कुछ नहीं मिलना है
सब दुःख तुम्हे सहना है
फिर भी चुप रहना है
क्योंकि तुम महिला हो
पुरुष की ज़िन्दगी तुम्हे केवल सपनो में जीना है
७
कोई अंत नहीं अत्याचारों का
ये जाति , ये लिंग , ये धर्म , ये गरीबी
सब मिलकर तुम्हे जब एक साथ धकेलते हैं
एक अंधे गहरे कुँए में , जहाँ कुछ नहीं और जिसका कोई अंत नहीं
८
हम मानकर चलते है , अन्याय होगा
अधिकार है पर पालन नहीं होगा
दोषी है पर पीड़ित नहीं होगा
मृतक है शैय्या नहीं होगा
राख है पर लाश नहीं होगी
सब मिलकर ख़त्म कर दिए जायेंगे
९
संवेदना प्रकट नहीं की
ट्वीट किया है
उत्तेजना प्रकट नहीं की
ट्वीट किया है
करवाई कुछ नहीं की
ट्वीट किया है
समूल नष्ट नहीं किया
ट्वीट किया है
बस यही आनेवाली पीढ़ी के लिए उपहार है हमारी तरफ से
१०
सब भाव भीतर ही महसूस करने हैं
प्रथा ऐसी चली की सब दुःख सहने हैं
कुछ कहा तो जुबां तक नहीं मिलने हैं
क्यूंकि मुझे जन्म के वक़्त नहीं मारा
इसिलए पूरी ज़िन्दगी मौत से बदतर कर दी
कोई नहीं है चारो ओर , सब चुप घरों में टीवी पर ड्रामा देखते हैं
- Get link
- X
- Other Apps
