१
तेरी बातें हम न दोहराएंगे
कुछ ना कहा तो बुरा मान जायेंगे
२
कुछ कहो की साँस चले
बीती हुई वो बात ढले
३
आदतन वो चुप रहता है
नियमतः वो सुन्न रहता है
४
अँधेरे कुँए में चिल्लाता हूँ
मैं खुद को दोहराता हूँ
आवाज़ नहीं आती किसी की
आखिर किसको मैं पुकारता हूँ
सब मर चुके है मित्र मेरे
मैं नया जहाँ बसाता हूँ
क्या करोगे सुनकर दास्ताँ मेरी
मैं ज़ख्म सारे छुपाता हूँ
बेचैन हूँ पिछले सदी से
अगले सदी से जाने किसे पुकारता हूँ
५
रोती रही परछाई
मैं न रोया
कोसती रही तन्हाई
मैं न रोया
सोचती रही खुदाई
मैं न रोया
पूछती रही जुदाई
मैं न रोया
६
किसको सत्य मानूँ और किसको मिथ्या
जिसने जाना नहीं उसने सब सत्य समझा
पृथक होकर मलिन रहा करता है
वो कहता था
मैं एक कहानी की दुनिया में रहा करता हूँ
८
दुर्दशा तो होनी थी
लोग धिक्कारते भी हैं
अपने पुचकारते भी है
देते है किस्मत की दुहाई
जो मैंने ठोकर खाई
अंत नहीं यह आगाज़ है
अभी छिड़ने कई साज है
प्रस्तुत होगा कल्पना का बिम्ब
चकित कुछ होंगे कुछ मौन
कथा उनको हम सुनायेंगे
सोचा जो वह कर दिखायेंगे
९
रेखांकित चेहरे
घाव कल के ठहरे
कुछ मौन कुछ सहमे
कहते कुछ शब्दों में नहीं
बाकी सब कुछ बोलता है
उनका
अब तलक सर गर्व से चलता है
१०
आदेश के माने कठिन
पालन कैसे करे पथिक
हस्त परस्त समझे जग
बताये कैसे अंतर का सच
अंतर्विरोध और अंतर्द्वंद
बढ़ रहे अब सबके अंग