सबको मारकर वीरता का आलिंगन
खेल तो ये पुराना था , अब मगर नियम अलग है
पहले दुश्मन गैर थे , अब सामने अपने खड़े हैं
बुद्धि हमारी हर ले गया भाषण उनका
हिंसा ही बन सका सिर्फ ताक़त अपना
सोच- विचार की क्षमता सब ले गया वो
हमको निहत्ता कर गया वो
एक सोचने की शक्ति थी , एक बात जो सबसे बनती थी
अब होगा अंजाम क्या , क्या धुप क्या , क्या छावं क्या
रक्तरंजित होगी हर घडी , मारेंगे सबको इसी घडी
है पूछता कौन की , मैं कौन हूँ
ख़त्म हो चुकी इंसानियत , वैसे जग का नेता हूँ
पीकर अपनों का हीं खून , बना वीर प्रणेता हूँ
मुझको क्या जानोगे , जब अपने अन्दर झांकोगे
मुझको कोने मे कहीं पाओगे
अग्नि का दूत हूँ , विनाश का प्रतिबिम्ब हूँ
सकल नर कंकाल हूँ ,काल का सवाल हूँ
देवी को पूजता हूँ , उनका क़त्ल भी करता हूँ
ऐसे ही एक संसार का मैं कायर क्रूर कराल हूँ
आओ देखो भुजाएं मेरी , सदियों से बेजान हैं
वक़्त ने जिन्दा किया ,तुम्हारे खून की हीं प्यास है
लड़ सको तो लड़ो , भिड़ सको तो भिड़ो
राक्षसों का वरदान है , मौत पे अभिमान है , वहीँ का तो निवासी हूँ , दानव नगर का वासी हूँ
बुलाओ, जो भी आ सके , तुम्हे मुझसे बचा सके , उनकी भी मौत के तुम्ही मगर जिम्मेदार हों
ये प्यास है रक्त की , सदियों से आ रही
तुमने अनगिनत जीव मारे , आज तुम्हारी बारी है