आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

अग्निवीरों का आवरण

जो सोये थे , अब जगे है


रक्त था , अब भी है

शर्म था , अब नहीं है

सब खुलेआम खेलते है मौत की बाज़ी

वो खूनी थे, मगर अब सरकार में हैं
भक्ति के नाम पर शक्ति का प्रदर्शन
सबको मारकर वीरता का आलिंगन
खेल तो ये पुराना था , अब मगर नियम अलग है
पहले दुश्मन गैर थे , अब सामने अपने खड़े हैं
बुद्धि हमारी हर ले गया भाषण उनका
हिंसा ही बन सका सिर्फ ताक़त अपना
सोच- विचार की क्षमता सब ले गया वो
हमको निहत्ता कर गया वो
एक सोचने की शक्ति थी , एक बात जो सबसे बनती थी
अब होगा अंजाम क्या , क्या धुप क्या , क्या छावं क्या
रक्तरंजित होगी हर घडी , मारेंगे सबको इसी घडी
है पूछता कौन की , मैं कौन हूँ
ख़त्म हो चुकी इंसानियत , वैसे जग का नेता हूँ
पीकर अपनों का हीं खून , बना वीर प्रणेता हूँ
मुझको क्या जानोगे , जब अपने अन्दर झांकोगे
मुझको कोने मे कहीं पाओगे
अग्नि का दूत हूँ , विनाश का प्रतिबिम्ब हूँ
सकल नर कंकाल हूँ ,काल का सवाल हूँ
देवी को पूजता हूँ , उनका क़त्ल भी करता हूँ
ऐसे ही एक संसार का मैं कायर क्रूर कराल हूँ



आओ देखो भुजाएं मेरी , सदियों से बेजान हैं
वक़्त ने जिन्दा किया ,तुम्हारे खून की हीं प्यास है
लड़ सको तो लड़ो , भिड़ सको तो भिड़ो
राक्षसों का वरदान है , मौत पे अभिमान है , वहीँ का तो निवासी हूँ , दानव नगर का वासी हूँ
बुलाओ, जो भी आ सके , तुम्हे मुझसे बचा सके , उनकी भी मौत के तुम्ही मगर जिम्मेदार हों
ये प्यास है रक्त की , सदियों से आ रही
तुमने अनगिनत जीव मारे , आज तुम्हारी बारी है

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