विकृति का महिमामंडन
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विकृति का महिमामंडन
चंद छंद की बात सुना
कैसे टूटा यह न बता
२
रिश्वत किसने नहीं कब खाई
सियासत किसके हिस्से आई
३
शिक्षा के गुणों में न त्रुटि
छोटे बच्चे की बोल खोटी
४
अंत काल तक कुछ याद रहा
दर्द गया पर पल वह ज़िंदा रहा
५
खिदमतगारों की केवल तारीफ़ हुई
सितमगरों को सियासत नसीब हुई
६
पीछे मुड कर क्या देखता रहता है
जो सोचता है वैसा बनता रहता है
७
हिम्मत टूटी ,निराशा सज आई
मिलने की घडी जब पास आई
८
जश्न जीत का नहीं हार का मनाओ
जियो शौक से मक़्तल में चले आओ
९
कृत्रिम उपहार का परिवेश नैतिकता का पैमाना बन चूका
जब जिसे जहाँ जो मिला वह उसे अपना ही न समझ सका
१०
उत्पीड़न के जाल में क्यों एक वर्ग कैद है
पूजता समाज में पर घर में समय तय है
११
होश में आकर पूरी बात सुनाओ
बेहोशी की हालत से मत शर्माओं
१२
आतंक एक वर्ग में वर्गीकृत किया जा चूका है
निशाना तय का आक्रमण किया जा रहा है
परदे में छुप , टीवी में घुस , सब मज़े ले रहे हैं
अख़बार में पढ़ते हैं , ख़बरों को चुनते हैं
लोग दिन ब दिन एक नया दुश्मन चुनते हैं
दुश्मन !
वह जिस पर सब बोझ डाल सके
समय पर गाली से नवाज सके
दुत्कार कर इतिहास में ठुकरा सके
क्या है इतना आसान है ?
बिलकुल है।
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