व्यक्तियों के सुविचार
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शांति कौन प्रदान करता है ? क्या किताब पढ़ने से शांति मिलती है , यूँ ही बेवजह सडकों पर घूमने से शांति मिलती है , या फिर तल्लीनता से ऑफिस का कार्य करने में ? पिछले कुछ सप्ताहों में कहीं नहीं मिली। तो यहाँ चला आया। अपने विचारों को एक जगह इकट्ठा कर लेना ,एक कूड़ेदान में डाल देने जैसा लगता है ,तो क्या जो लिख रहा हूँ वह बकवास है ,कुछ कुछ तो है। इंस्टा पर रील्स देखकर दिन काटना और रात को दिन बदलने के इंतज़ार में जागना ,कुछ ऐसे ही बीते रहे हैं सप्ताह। मित्र हैं और नहीं भी ,उस पड़ाव पर हैं जहाँ बातों का सिलसिला समाप्त हो चूका है ,और किसी से कुछ कहने को रह नहीं गया ,विश्वास यह है कि सामने वाला सुन तो लेगा पर अगली बार फ़ोन नहीं उठायेगा ,तो ऐसा महसूस होने के क्या कारन हैं इसका पता अगले जन्म में लगाऊँगा।
तो बात उस दौर की है जब बिटकॉइन पर दुनिया भारी थी ,तो हमने भी साथ छोड़ दिया एक कमरे में ताला लगाकर ,अब दुनिया उसे पूछ रही है तो हम भी मैच प्रेडिक्ट कर रहे हैं ताकि फिर से उसे हासिल कर सके ,आने वाले वर्षों में क्या होगा इसका पता लोग इतिहास में घट चुके घटनाओं में एक पैटर्न स्थापित कर प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं ,इस प्रयास में कितनी सफलत मिलती है यह भविष्य के गर्भ में है ,मगर जिसने अपना धन लगाया है वह तो चाहेगा कि मंगल ग्रह पर एक एकड़ ज़मीन तो ले ही ले। बाकी फ़िल्मी सितारे गुटखा और जुआ का प्रचार कर धन बटोर रहे हैं ,फिर माफ़ीनामा ज़ारी कर अपने फैन को खुश करने की भी कोशिश करते हैं। खेल टेढ़ा है ,जिसे समझ आये कि सबकी धुरी धन पर ही घूमती है तो वह फिर चाय और कॉफ़ी की लड़ाई में नहीं पड़ेगा।
ट्विटर पब्लिक से प्राइवेट कंपनी बनने वाली है ,लोग जश्न मना रहे हैं। जिस एक व्यक्ति ने ख़रीदा है ,अब उसके ट्वीट्स के भरोसे अपनी लड़ाई ज़ारी रखे हैं उसके समर्थक । हम कहते हैं कि हमे सत्ता विकेन्द्रीकरण में विश्वास है ,ब्लॉकचैन तकनीक उसी का जरिया है ,पर असल जीवन में ऐसा है नहीं ,हमे नायक चाहिए और वह भी पुरुष , एक नायक जो सब अविष्कार करेगा और सब दुःख हर लेगा। जैक कहता है उसे केवल एलोन में ही उत्तर नज़र आता है ,कुछ समय पहले वह ट्वीटर को ओपन और ट्रांसपेरेंट करना चाहता था ब्लॉकचैन का इस्तेमाल कर ,और अब केवल व्यक्ति पर ही इतना भरोसा कैसे हो गया अचानक। एलोन कहता है पब्लिक कंपनी में स्क्रूटिनी ज्यादा है ,नवाचार नहीं हो पाता ,शार्ट सेलर्स लंका लगा देते हैं ,तो एप्पल के जॉब्स कैसे सबकुछ किया करते थे। एलोन को स्वयं से प्रेम है जैसा सभी को होता है। अब आगे देखिए पराग भाई इन सब में कैसे स्वयं को देखते है और आगे क्या कदम होता है उनका।
मूलभूत सुविधाओं की प्राप्ति के बाद मानव कुछ विकराल और विशाल करने का प्रयास करता है , तो कुछ संतुष्ट होकर अपने आस पास ज्ञान गंगा बहाना शुरू कर देते हैं , जहाँ मै हूँ ,वहीँ सबको होना चाहिए ,यह विचार के साथ पथ प्रदर्शन में जुट जाते हैं। कोई सलाह माँगे अथवा न माँगे ,उम्र के उस मक़ाम पर हैं जहाँ वह अपने फ़िज़ूल विचारों को अमृत समझ सडकों पर बाँटते फिरते हैं।
कैसी पर्सनालिटी हैं आपकी ,क्या आप बार बार एक ही बात दोहराते हैं ,जो चाहते हैं उसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। या फिर जैसा चल रहा उसमे थोड़े से परिवर्तन से संतुष्ट हो गन्ने के रस का आंनद लेते हैं ?
अलविदा
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