बोझ का मतलब ?
क्या है बोझ का मतलब ? वैसे ट्रक जो ऑवरलोड चालान से बचने के लिए रिश्वत देता है ,या वैसा यह कहता है केवल दिनचर्या में परिवर्तन मात्र से अवसाद ख़त्म किया जा सकता है ,या फिर वह जो मानता ही नहीं कि अवसाद जैसे कोई चीज़ होती भी है। जीवन जीने के अनूठे तरीक़े सदियों से आज़माये गए और शब्दों में अंकित कर बाज़ार में बिकवाया --मगर रोटी की चिंता और ज़मीन की लड़ाई में आधी प्रजाति साफ़ कर दी हमने -अब सबकुछ बिगड़ जाने के बाद इतिहासकारों को जेल में बंद करने की योजना बना रहे --क्यूँकि उन्होंने सही गुनहगारों का पता न बताया।
पेट की अपनी अपनी बीमारी है -कोई भोजन की अधिकता से नहीं खा सकता तो कोई भोजन की कमीं से -उपचार दोनों के पास हैं मगर अंतर यह है कि एक के कण्ट्रोल में है और दूसरे के नहीं। भोजन को लेकर जाति के नज़र कम लोग अध्ययन करते हैं --अफ़सोस कि वह कहीं पीछा नहीं छोड़ता भले कितना भी हम स्कीम बना बना कर मंत्रियों के नाम बदलते रहे।
एक ज़माना था जब सरकार माई -बाप थी (अभी भी है), कुछ प्रबुद्ध जन बताते हैं ९१ में उदारवाद आया अमेरिका के एक बड़े बैंक के टर्म्स एंड कंडीशंस के रूप में ,तो धड़ल्ले से सब दुःख दूर होने वाला सपना की तरह आया था यह --मगर जैसे हमारे यहाँ पहुँचा की अंग्रेज़ों की तरह हिंदी बोलने लगा। कुल मिलकर उसको हमने वैसे ही अपनाया जैसे गर्मी में लोग ऊनी वस्त्र --जब फ्लाइट से उतर रहा था तो कुछ सीढ़ी के उच्च पायदान पर बैठे थे वर्षों से इंतज़ार में --निचे पायदान वालों को तो अब तक नहीं बताया कि ऐसा कोई ब्रह्मास्त्र हमने अमेरिका से लाया भी था --हम तो अभी भी अँग्रेज़ों को टेस्ट मैच में उनके ही गली में हरा के दाँत चियार रहे हैं और दुबई में आईपीएल में सट्टा वाला एप्प डाउनलोड कर पैसा उड़ा रहे हैं।
नेताओं के स्वागत के लिए नेता एयरपोर्ट पर फूल माला लेकर पहुँच जाता है ,वैसे ही अमेरिका वाला उदारवाद के स्वागत में बम्बई दिल्ली वाले प्रबुद्ध जन अपने अपने प्रतिनिधियों को भेजकर अपना -अपना हिस्सा मँगवा के भर लिए तिजोरी में। कुछ अपने प्रतिनिधियों को दिए जिसको निचे पायदान वाले समझते थे की हमने चुना है वोट देकर तो कुछ हमरो लिए भी लाएगा ही --मगर ऐसा हुआ नहीं बल्कि झूठी कहानी बनाई की रास्ते में अँधेरा था तो पता नहीं चला कौन लूट लिया सारा माल --अब अगले खेप में मिलेगा सबको --उसी अगले -अगले खेप के इंतज़ार में ७५ साल पूरा होने वाला आज़ादी का।
तो आखिकार वो लोग भी पहुँचे बॉम्बे दिल्ली ,कि देखे कौन है जो सब माल खा गया ,वहाँ पहुँचे तो उनको काम पर लगा दिया और कहा कि यहाँ इतना महँगाई है तुम्हारे पास तो कुछ है नहीं --अब यहाँ रहना है तो कमाओ या वापस जाओ. तो पुराना शिकायत भूलकर काम पे जुटे हैं --कभी खत्म नहीं होता है भले २४ घंटे लगे रहे।
बाकि आपलोग ख्याल रखें --उन लोगों का ख्याल रखने वाला प्रतिनिधि मंत्री है।