१
क्रोध रोष का भाव छोड़
इस पार चला आया
अब तक मगर कुछ न पाया
सोचता हूँ
है जो यह माया
कितना इसने सबको सताया
चक्र में सबको घूमाया
फिर दिखाया मौत का साया
अब तो अंत समय आया
बचा केवल अफ़सोस भाया
२
रूप टूटा क्यों दिखाऊँ
सच तुम्हे क्यों सुनाऊँ
दर्द तुम्हे क्यों जताऊँ
हर्ज़ तुम्हे क्यों बताऊँ
तुम उन्ही में से एक हो
भले कितने ही नेक हो
लौट जाओ अपनी गली
ये मौत हमे अच्छी भली
हम न सामने रोयेंगे
अब न और खोयेंगे
३
पल एक
बदला सब तुमने
पूछा न किसी से सबने
फैसला तुम्हे ठीक लगा
असर तुम पर कुछ न हुआ
आफत सब हमने सहा
बंद कर दो ये झूठा बाज़ार
लोग मनाये क्यों त्यौहार
कहे क्यों न तेरा अत्याचार
कोई तो सुने हमारी पुकार
सदियों के जुल्म का हाहाकार
पडोसी जलते है
झूठा कान भरते है
मौत के घर अब हम रहते है
४
तेरी एक उदास कहानी
बूढी हुई जवानी
लोग थक गए
हैं पूछते
क्या नहीं कोई और कहानी
रंग और कलाकार बदले
कहने के तरीके बदले
मगर कहानी वही रही
अब नई पीढ़ी है
लम्बी नई सीढ़ी है
शायद इन्हे
यह कहानी समझ आ जाये
५
सच कहीं तो फूटेगा
रास्ता कहीं तो टूटेगा
कोई तो आगे आयेगा
जो हमको छुड़ायेगा
बेड़ियाँ दिखती नहीं
उनकी ज़रुरत भी नहीं
है मगर इंतज़ार किसका
बचा कहाँ कोई मुझ सा
खुद से मिलना होगा
खुद को लड़ना होगा
६
कठिन क्या नहीं है
सच कहो
कठिन क्या है
क्या है
और क्या नहीं है
क्या है कि
जो तुम सोचते हो
क्या नहीं है कि
जो तुम करते हो
छोटा अंतर बड़ा जंतर
कुछ नहीं समझा मगर
७
हस्त रेखा
किसने देखा
पुत्र होगा या पुत्री
नेता होगा या नेत्री
सोच नहीं तनख्वाह बढ़ी
शब्द रचना है कठिन
सोचा नहीं कभी कहीं