आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

कहाँ- कहाँ , कौन- कौन है , सब यहाँ- यहाँ, यहीं पर है

कब्र की शक्ल में लम्हा गुजरता है , पास कहीं खोया पड़ा है 
वह देखो, ज़िन्दगी तुम्हारी , धु -धु कर, स्वयं दहन होती है 



क्या यूँ ही जिया जायेगा , कब आये -कौन किसके , अब आये -सब अपने 
हमने अपना न पहचाना , राह चला, मगर न अपना माना 
इक दर्द का अंतर समझते हो , एक का अंत और दूसरे की शुरुआत 
बीच में हो तुम , तुम हो बीच में कहीं , ढूंढो अपने आप को 





हरियाली यहाँ से होकर गुजरती थी , मछलियां तैर कर चलती थी 
सूरज ज्यादा यहीं ठहरता था , सब मिलने यही आते थे 
खेलें खेल बचपन के सब , बड़े होकर भी यहीं है 
मगर अब सब सुख गया है , कोई यहाँ नहीं आता 
मछलियाँ कबकी मर गयी , सूरज अब आग उगलता है 
क्या हुआ सब बदल गया , हरा- हरा कैसे सूख गया 
जल का व्यापर बना डाला , जल का सत्यानाश कर डाला 
अब नाले भी है सूखे हुए , नदियों  से रूठे हुए 
अब हम ऊंचे मकां में रहते है , पानी  खरीदकर पिते है 
अब पानी  बोतलों में बिकता है , शुद्धता का पारा चमकता है 
इसके भी हम आदि हो गए , सब कुछ बिकने लगा जो बाज़ारों  में 
संजोने की ज़रूरत क्या है , ख़त्म होगा खरीद लेंगे 
वस्तुयें हीं तो है , पैसे हैं , क्या मिलता नहीं बाज़ारों में 



हर इक शाम , एक नाम, एक काम, एक सपना ही देखता हूँ 
मैं एक हूँ, या इक नज़र से देखता हूँ 
कई मेरे अंदर है , केवल एक बाहर है , या  घूमता वृत कईओं का मेरे अंदर है 
सच तुम ही कहो , किससे  मिलने आये हो, एक चेहरा या एक याद लिए आये हो 
सब तुम ही तय करो , हम तो अपनों के भी न हुए , तुम तो पराये लगते हो 
एक दिशा में जाने की चाह थी ,जाने उस और कौन सी राह थी 
एक लक्ष्य था , एक सत्य था , कुछ जल रहा था भीतर , उसको बुझाने की ही चाह थी 










































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