आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

 

३१ जनवरी २०२१ 

आज सुबह ही पता चला की मैं एक पार्टी में invited हूँ ,और देखिये शॉक से बचने के  लिए मैंने लाखों उपाय किये हैं आज तक ,पर पार्टी तो हर कोई अटेंड करना चाहता है ,पर मैं नहीं चाहता ,पहला कारन की दौर कोरोना का है और सोशल गैदरिंग में शामिल होना अपने जान से खतरा मोल लेना है ,दूसरा जो व्यंजन  परोसा जायेगा उसमे चिकेन की भी होने की संभावना है ,और आजकल  बर्ड फ्लू चरम पर है। तो ,आपने देखा कैसे मैंने कई कारन बता दिए पार्टी में शामिल न होने के ,मगर सामनेवाला इन कारणों पर बिलकुल भी विश्वास नहीं करता क्यूँकि यह कारन बहानों का रूप ले चुके हैं उसके लिये भले ही वो कितने  भी सच्चे क्यों न हो ,और ऐसा सिर्फ इसीलिए क्यूँकि यह कारन पार्टी के चलने के दिन जब तैयार होने की बात आती है तब  दिए जाते हैं। मतलब अगर इन कारणों में इतनी शक्ति थी की वो किसी को पार्टी में जाने से रोक दे तो इन्हे पार्टी के दिन ही क्यों प्रकट होना पड़ा ,यह तब क्यों नहीं प्रकट हुई जब पार्टी  की प्लानिंग चल रही थी ,मतलब आपके विश्वास इन कारणों पर उतने नहीं है जितने होने चाहिए और इसीलिए यह कारन बहाने का रूप ले चुके हैं यह बात  अलग है की ये एक वाजिब कारन अभी भी हैं। 

तो पार्टी में नहीं जाने से मैं क्या मिस करूँगा ,यह विचरने का वक़्त  आ गया है ,पहला तो है भोजन ,दूसरा नए लोगो से  पहचान ,तीसरा है कहानियों की संभावना ,भोजन को तो  कम्पेन्सेट किया जा सकता  है ,नए लोगो से पहचान न हो पाने का गम इस कोरोना काल में उतना नहीं और वैसे  भी कोई लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में मुझे नाम तो दर्ज़ करवाना नहीं है की मैं कोरोना काल में इतने  नए लोगो से मिला जब सब अपनी जान बचाने घर  में दुबके हुए थे ,तो इसको भी सहा जा सकता है ,तीसरा है नए कहानियों की संभावना ,हाँ इसका थोड़ा कष्ट तो होगा पर सह  लेंगे थोड़ा ,आगे जीवित रहे तो कहानियाँ और सोच लेंगे। 

 

कुल मिलकर मैंने अपने आप को पार्टी में न जाने के निर्णय को सही ठहराये जाने के एवज में सारी दलीलें पेश कर दी हैं ,बाकि उसकी मर्ज़ी। पर देखिये ,आप कितना भी तर्क वितर्क करें पर सामनेवाले के जब भावनाये आहत होती हैं तो उसका निदान करना ज़रा मुश्किल होता है ,क्यूँकि उसका निदान तर्क और मधुर शब्द नहीं केवल समय कर सकता है, इसीलिए ऐसी परिस्थितयों में धैर्य का परिचय देकर इंतज़ार करना सबसे ठोस रास्ता है। अक्सर कुछ चीज़े छोड़ देने से थोड़े समय बाद उनमे परिवर्तन स्वतः आ  जाता है  . कुछ न करना कभी सबसे कठिन कार्य होता है, जैसे परीक्षा ख़राब जाने  के  बाद भी टॉप कर जाने का इंतज़ार.  

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