आधार निवेश का सम्मोहन

  १  विरोध में जीवन  मृत्यु में संगम  २  आक्रोश का हल  जीवन है सफल  ३  मर्यादा की लड़ाई  मुसीबतों की परछाई  ४  प्रयासों से परिवर्तन  जीवन के मूल्य चिंतन  ५  ऊर्जा की निधि  सम्मान की परिधि  ६  शब्दों के मेल  कर्मों के जेल  ७  विचार परिवार का सम्मलेन  आधार निवेश का सम्मोहन  ८  एक सफल जीवन  छुपा हो केवल चिंतन  ९  न हो कोई अभिलाषा  जीवन की परिभाषा  दुःख में घोर आशा 

Live More with Less



सरदर्द 




वो क्या है 

  वहीँ तो  है

जो रख दिया  

ज़मीन  पर  तो 

        खो गया  जमींर  है    


        

उस शाम की तलाश  में

कितने दिन गुज़ारे हैं

उस सुबह की तलाश  में

कितने राते  काटी  हैं




राम के नाम पर

रहीम के काम पर

हर रोज़   झगड़   रहे

पैदा हुए एक ज़मीन पर

तो फिर  क्यों बिछड़  रहे






कर्म की धुप में

शर्म की थोड़ी छाँव  हैं

आराम  के नाम पर

सब  रहा हराम  हैं




सब समझता  है

कहता  कुछ नहीं

सब  करते हैं

करता कुछ नहीं



जंगल में  गुम  

विचारो  के जाल  

तम  का  निवास  

कर्तव्य ही  आस  



बोली जो बोली

बातो की टोली

रंगो में निकली

पहुंची उस पार

 तोबदरंग  और  मैली




यादों के जंगल को

चलो कोई नाम दो

जो खोये   है  उनमे

थोड़ा  उन्हें  भी

अब  आराम  दो




भूलने वाली  आदत

 यार पुरानी  हैं

बचाई  इसने मगर

मेरी रवानी है





उठो

की अब देर हुई

चलो

की  मंज़िले  अभी  और  भी हैं




कौन करे

सुबह तक  का  इंतज़ार

सब  सहेंगे

बढ़ायेंगे  वक़्त की   रफ़्तार

अभी तो

सामने  ही  था

झूठा  ही

मगर   सच जैसा   ही था




करीम के करम की करामात  

हुई सोने  की बरसात

सोया मगर वो  रहा

जागनेवालो  ने  समझा

अपने - अपने  किस्मत  की सौगात



एक  नदी  के किनारे

हरे पत्तो  के सिरहाने

सब  ठीक  था,   की

फिर  सुबह  हो गयी


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