मरना और जीना
ज़िन्दगी एक अफ़साना है जो मिल के साथ बिताना है ,
इसमे कुछ गँवाना है कुछ पाना है
जो पाना हैँ वो फिर खोना है ,
जो गँवाना हैं वो फिर पाना है
ये सिलसिला पुराना है ,
जो हर किसी ने माना है
कोई कितना भी कर ले , एक दिन सब यही छोड़ के जाना है
हम रोयेंगे वो हसेंगे , ये दुनिया का गाना है
फानी दुनिया ना तेरी ना मेरी इसका क्या ठिकाना है
इसकी सोच में सब खोये है न जागे ना सोये है
जो है उसकी परवाह नहीं , जो नहीं है उसके पीछे रोये है
क्यों माने ऐसी दुनिया को जो तेरी है न मेरी है
जो बात ये समझे वो जीता है
बाकि तो हँसते रोते रहते है
वो जीता है सबको अपना माने ,
ना खोने का गम ना पाने की खुशी
वह जीते जीते जीत गया
और मरने के बाद भी जीता है
उसकी कहानी सब गायेंगे ,
कुछ भी कर ले उसको रोक नहीं पाएंगे
क्यूंकि उसके लिए तो मरना भी एक जीना है ,
कुछ्लोग जीकर भी है मरे हुए ,
और कुछ मरकर भी हैं ज़िंदा यहाँ
हम किसमे शामिल हो ये आज हमे तय करना है
क्यूंकि मरना भी एक जीना है
और जीना भी एक मरना है
ये रोज़ रोज़ की बाते नहीं
जो फेसबुक पे शेयर करना है
ये मन की बाते है
जो मन से मन को कहना है
जीना मरना और मरना जीना
, नाटक ये सदियों पुराना है
रचनाकार : राकेश